mp news: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चर्चित भोजशाला विवाद (Bhojshala Dispute) को लेकर सुनवाई चल रही है। बुधवार को मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के तर्क रखे।
Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप और स्वामित्व को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में बुधवार को सुनवाई जारी रही। मौलाना कलामुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने तर्क पेश किए, जो अगले दिन पूरा किया जाएगा। मुस्लिम पक्ष द्वारा दलीलें रखे जाने के बाद एएसआई की तरफ से वरिष्ठ वकील अपना तर्क पेश करेंगे। (mp news)
बुधवार दोपहर हुई सुनवाई में मस्जिद पक्ष से लगभग ढाई बजे शुरू हुई सुनवाई में खुर्शीद ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहले यह तय होना चाहिए कि भोजशाला का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है। खुर्शीद ने स्पष्ट किया कि 'स्वामित्व का निर्धारण आस्था या विश्वास से नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया से होना चाहिए।'
सुनवाई के दौरान सलमान खुर्शीद ने अयोध्या राम जन्मभूमि केस का उदहारण दिया। उन्होंने अयोध्या फैसले का हवाला देते हुए बताया कि अयोध्या मामले में रामलला विराजमान पक्षकार थे, जबकि भोजशाला मामले में ऐसा नहीं है। उनका कहना था कि अचल संपत्ति या जमीन को व्यक्ति की तरह मानकर स्वामित्व निर्धारित नहीं किया जा सकता। इसलिए याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।खुर्शीद ने यह भी कहा कि भोजशाला जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय सुनाने पर रोक लगा रखी है। उन्होंने अयोध्या मामले में एएसआई के सर्वेक्षण और मिले साक्ष्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि मूर्ति और जमीन को समान नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने नोट किया कि हिंदू फ्रंट फार जस्टिस ने याचिका में स्वामित्व का निर्धारण नहीं मांगा, बल्कि 24 घंटे पूजा का अधिकार मांगा है। खुर्शीद ने कहा कि जब स्वामित्व तय नहीं है, तो याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि स्वामित्व के बिना पूजा का अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता। बता दें कि, गुरुवार को खुर्शीद अपने तर्क पूरे करेंगे। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन अपने तर्क पेश करेंगे।
बता दें कि, कोर्ट ने इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वे की वीडियोग्राफी को अपने पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया है कि वह अपने पूरी वीडियोग्राफी रिकॉर्डिंग याचिकाकर्ताओं और संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए। इसके लिए एएसआई को 27 अप्रैल तक का समय दिया गया है। (mp news)