
Indore news:मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में अब पूजा-पाठ कराने के लिए घर बैठे आराम से पंडित मिलेंगे। डिजिटल दौर में धार्मिक अनुष्ठानों को भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई है। शहर के स्टार्टअप ने पंडितों और यजमानों के बीच डिजिटल माध्यम से संपर्क स्थापित करने का मॉडल तैयार किया है। प्लेटफॉर्म पर करीब 700 पंडित रजिस्टर्ड हो चुके हैं और दीपावली पूजा के लिए इनमें से करीब 70 फीसदी की बुकिंग हो गई है। इस पहल से लोगों को घर, दुकान और ऑफिस में पूजा के लिए पंडित उपलब्ध हो रहे हैं तो पंडितों के लिए भी रोजगार व अतिरिक्त आय का माध्यम तैयार हुआ है। दीपावली पूजन के साथ गृह प्रवेश, सत्यनारायण कथा, विवाह, मुंडन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी ऑनलाइन बुकिंग की जा रही है।
मालूम हो, दीपावली के दौरान घरों में लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ दुकानों, प्रतिष्ठानों और ऑफिसों में भी विशेष पूजा कराई जाती है। एक ही दिन और सीमित मुहूर्त में पंडितों की जरूरत होती है। लोगों को परिचितों के माध्यम से पंडित तलाशने पड़ते हैं। कई बार समय पर उपलब्धता नहीं हो पाती। इसी जरूरत को देखते हुए दीप्तेश तिवारी, नीलेश तिवारी व योगेंद्र पांडे ने बिजनेस मॉडल बनाया है। टेक्निकल टीम बनाकर पंडितों से संपर्क किया। इसके बाद एक पंडित को शामिल किया और वेरिफिकेशन कराया कि संबंधित को पूजा पद्धति आती है या नहीं। इसके बाद वेरिफाई पंडितों की टीम बनाई। सॉफ्टवेयर से बुकिंग प्रोसेस शुरू की। इसमें 20 फीसदी एडवांस व शेष राशि पूजन के बाद देने की व्यवस्था रखी है। पंडित निर्धारित स्थान पर पहुंचकर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा कराएंगे।
पूजन करवाने वाले इंदौर के श्याम पटेल ने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क किया था। नवमी व दशहरा पर व्यापार पूजा कराई। पंडित समय पर आए व विधि-विधान से पूजन कराया। मैं इंदौर के बाहर से हूं। पहली बार इस तरह पूजन कराया।
स्टार्टअप की ओर से केवल पंडित बुकिंग ही नहीं, बल्कि पूजन सामग्री की व्यवस्था का विकल्प भी दिया जा रहा है। घर, दुकान और ऑफिस के लिए अलग-अलग पूजा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्लेटफॉर्म के प्रचार के अनुसार, अनुभवी पंडित यजमान के स्थान पर पहुंचकर विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन कराएंगे। इससे उन लोगों को सुविधा मिलेगी, जो व्यस्तता के कारण पूजा की तैयारियों और पंडित की व्यवस्था के लिए
पंडितों को यजमानों तक पहुंचने के लिए परंपरागत रूप से व्यक्तिगत संपर्क, परिचितों और स्थानीय नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद उन्हें नए यजमान मिलने की संभावना बढ़ी है।