
Indore news:एमपी के इंदौर शहर में हर गुजरता घंटा एक परिवार की खुशियां छीन रहा है। बच्चों के लिए काम करने वाली एनजीओ आस के चौंकाने वाले खुलासे ने बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संस्था का दावा है कि हर घंटे एक बच्चा लापता हो रहा है, जबकि अकेले इंदौर जिले में 54 बच्चों को संदिग्ध चाइल्ड ट्रैफिकिंग के जाल से बचाया जा चुका है।
चिंता की बात यह है कि ये तो सिर्फ वे बच्चे हैं जो समय रहते मिल गए। आशंका है कि कई मासूम अब भी इस संगठित गिरोह के शिकंजे में फंसे हुए हैं और उनकी कोई खबर नहीं है। संस्था के निदेशक वसीम इकबाल ने बताया कि मानव तस्करी आज ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के बाद दुनिया का सबसे बड़ा संगठित अपराध बन चुकी है।
तस्कर किसी दूर-दराज के नहीं, बल्कि अक्सर आसपास के ही लोग होते हैं जो गरीब और जरूरतमंद परिवारों को नौकरी, अच्छी पढ़ाई, बेहतर भविष्य या ज्यादा कमाई का लालच देकर बच्चों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। कई मामलों में माता-पिता भी झांसे में आ जाते हैं और बाद में बच्चों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
इसी खतरे को देखते हुए संस्था ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ देशव्यापी जागरुकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान में कई और सामाजिक संगठन भी सहयोग कर रहे हैं। अभियान का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि बच्चों को नौकरी, प्रशिक्षण या दूसरे शहर ले जाने के नाम पर मिलने वाले हर प्रस्ताव की पूरी जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस या संबंधित एजेंसियों को दें।
वसीम के अनुसार इंदौर में बचाए गए 54 बच्चों में अधिकांश बाल मजदूरी करते हुए मिले। कई बच्चों को कारखानों, दुकानों और अन्य स्थानों पर काम कराया जा रहा था। समय रहते कार्रवाई होने से इन्हें सुरक्षित निकाला जा सका, लेकिन आशंका है कि अभी भी कई बच्चे ऐसे नेटवर्क के चंगुल में फंसे हो सकते हैं। संस्था का कहना है कि चाइल्ड ट्रैफिकिंग केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी का विषय है। यदि आम लोग सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधियों की समय पर जानकारी दें, तो कई मासूमों का बचपन बर्बाद होने से बचाया जा सकता है।