MP news: एमपी में रहने वाले दिव्यांगजन को नियमों के हिसाब से पेंशन नहीं दी जा रही। इस पर इंदौर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
MP news: मध्य प्रदेश में रहने वाले दिव्यांगजन को नियमों के हिसाब से पेंशन नहीं दी जा रही। इस पर इंदौर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। युगलपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा कि जब महिलाओं को लाड़ली बहना योजना के तहत 1500 रुपए दिए जा रहे हैं तो दिव्यांगों को नियमानुसार 1875 रुपए पेंशन क्यों नहीं दी जा रही?
परिवार नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ पैरेंट्स ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष पंकज मारू की ओर से अधिवक्ता मनीष विजयवर्गीय ने ये जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की है। अधिवक्ता विजयवर्गीय के मुताबिक वर्ष 2023 में एक जनहित याचिका दायर की थी, हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए थे कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत दिव्यांगों को पेंशन दी जाए। जिस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नियमों के हिसाब से पेंशन देने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश का पालन कराने के लिए सरकार को आवेदन दिया गया था, जिसे सरकार ने ये कहते हुए खारिज कर दिया कि ये केंद्र सरकार का विषय है।वो इसमें कुछ नहीं कर सकती। इसके बाद ये दूसरी बार याचिका दायर की गई।
याचिका में मांग की गई है कि संविधान के तहत दिव्यांगजन के हितैषी काम करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की धारा-24 में स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य सरकार जो पेंशन राशि अन्य योजना के तहत बाकी लोगों को देती है, उससे 25 फीसदी ज्यादा राशि दिव्यांगों को देनी होगी। राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना के तहत 1500 रुपए महिलाओं को दे रही है। ऐसे में दिव्यांगों को भी नियमों के तहत 1875 रुपए पेंशन दी जानी चाहिए।
बुधवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि दिव्यांगजन को अभी मात्र 600 रुपए पेंशन दी जाती है। नियमानुसार उन्हें 1875 रुपए पेंशन की पात्रता है। कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। कोर्ट अब 4 मई को इस मामले की दोबारा सुनवाई करेगी।
2023 में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया था कि पिटीशनर राज्य सरकार को एक रिप्रेजेंटेशन दे। लेकिन, राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार की स्कीम बताते हुए पेंशन बढ़ाने से मना कर दिया। पिटीशन में यह भी मुद्दा उठाया गया कि अभी, राज्य में सिर्फ 6 से 18 साल के दिव्यांग लोगों को ही पेंशन का फायदा मिल रहा है। पिटीशनर ने 0 से 6 साल के दिव्यांग बच्चों को भी शामिल करने की मांग की थी लेकिन, सरकार ने यह कहते हुए इस मांग को खारिज कर दिया कि ऐसे बच्चे अपने गार्जियन पर डिपेंडेंट होते हैं।