इंदौर

अंदरूनी गुटबाजी का शिकार भाजपा, इंदौर में किसी नेता को नहीं मिला सत्ता का पद

BJP internal politics: इंदौर भाजपा अंदरूनी गुटबाजी का शिकार, प्रदेशभर में नियुक्तियां होने के बावजूद यहां किसी नेता को सत्ता का पद नहीं मिला।
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Aug 06, 2026
BJP internal politics: सत्ता और संगठन में नहीं हो रही नियुक्तिया (Photo Source - Patrika)
BJP internal politics: सत्ता और संगठन में नहीं हो रही नियुक्तिया (Photo Source - Patrika)

Indore news: मालवा-निमाड़ की राजनीति का केंद्र बिंदु एमपी के इंदौर को माना जाता है। यहां पर होने वाली हलचल का असर पूरे अंचल पर पड़ता है, लेकिन इंदौर अब भाजपा की अंदरूनी राजनीति का शिकार हो रहा है। एक भी नेता को सत्ता की रेवड़ी का स्वाद चखने को नहीं मिला, जबकि पूरे प्रदेश में नियुक्तियां हो गर्ईं। ऐसी ही स्थिति संगठन की है जिसके मोर्चे प्रकोष्ठों में मुखियाओं की घोषणा नहीं हो सकी। इंदौर भाजपा को संगठन की प्रयोगशाला माना जाता है, यहां पर तैयार हुए फॉर्मूलों को प्रदेश ही नहीं देशभर में लागू किया जाता है।

शक्ति केंद्र की रचना सबसे पहले इंदौर में की गई जिसके बाद देशभर में लागू हुई। उसके बाद कुछ वर्षों पहले तत्कालीन संगठन महामंत्री सुहास भगत ने युवाओं का आगे लाने के लिए संगठन के पदों में उम्र का बंधन लागू किया जिसमें 35 साल से कम उम्र के मंडल अध्यक्ष बनाए गए तो 40 से कम के गौरव रणदिवे को नगर भाजपा की कमान सौंपी गई। युग परिवर्तन का ये फॉर्मूला जब सफल हुआ तो देशभर में लागू किया गया। ये प्रयोगशाला इन दिनों प्रदेश भाजपा संगठन की उपेक्षाओं का शिकार हो रही है।

इंदौर को नहीं मिला पद

गुटबाजी के चलते इंदौर को अब तक सत्ता में होने वाली राजनीतिक नियुक्ति का सुख नहीं मिल पाया है। आधे से अधिक निगम, मंडल और प्राधिकरणों की घोषणा हो गई है, लेकिन एक भी पद इंदौर को नहीं दिया गया। चौंकाने वाली बात ये है कि प्रदेशभर की नगर निगम, नगर परिषदों में एल्डरमैन की नियुक्ति हो गई है, लेकिन इंदौर की घोषणा रोक दी गई। इसी प्रकार जनभागीदारी समिति सहित कार्यकर्ताओं को उपकृत करने वाली समितियों में भी नियुक्ति नहीं हुई है। अब कार्यकर्ता ठगा सा महसूस कर रहा है। देखा जाए तो संगठन की तरफ से इंदौर की उपेक्षा ही की जा रही है।

मोर्चा और प्रकोष्ठ में नहीं हुई नियुक्ति

प्रदेश भाजपा के मोर्चा और प्रकोष्ठों में पदों की बरसात हो रही है, लेकिन इंदौर में सूखा पड़ा है। अब तक सिर्फ अजा, अजजा और पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष की घोषणा हुई है, लेकिन महत्वपूर्ण माने जाने वाले युवा और महिला मोर्चा अभी भी खाली है। ये स्थिति सिर्फ नगर ही नहीं ग्रामीण इंदौर की भी हो रही है। पैनल भेजे जाने के बावजूद अब तक घोषणा नहीं हुई है। प्रदेश संगठन इंदौरी गुटबाजी का हवाला देकर नियुक्ति नहीं कर रहा है, जबकि हकीकत ये है कि प्रदेश में काबिज मोर्चा अध्यक्ष अपनी पसंद से यहां पर अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। इधर, इसी वजह से किसान मोर्चा में भी नियुक्ति नहीं हुई है।

सिर्फ दो ही नेताओं के पास हैं पद

मजेदार बात ये है कि सरकार के राजनीतिक पदों में इंदौर के सिर्फ दो ही नेताओं को पास पद है। अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष पद पर सावन सोनकर काबिज है तो प्रताप करोसिया हाई कोर्ट के स्टे पर सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष बरकरार है। एक आदेश के बाद शासन ने उन्हें हटा दिया था जिसके खिलाफ वे कोर्ट गए थे।

Updated on:
06 Aug 2026 02:15 pm
Published on:
06 Aug 2026 02:14 pm