इंदौर

MYH का कमाल : एमपी में पहली बार डॉक्टरों ने किया शख्स की मूत्रनली का पुनर्निर्माण

MYH Achievement : MYH का कमाल, एमपी के सरकारी अस्पताल में पहली बार हुई जटिल एंटेरो-यूरेथ्रोप्लास्टी। ढाई साल से परेशान युवक को मिली राहत। दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई थी मूत्रनली, डॉक्टरों ने पुनर्निर्माण किया।
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MYH Achievement
MYH Achievement (एमपी में पहली बार डॉक्टरों ने किया मूत्रनली का पुनर्निर्माण Photo Source- Patrika)

Indore MYH : एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स की टीम ने मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के सबसे बड़े सरकारी एमवाय हॉस्पिटल में अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी की है। अस्पताल में पहली बार एंटेरो-यूरेथ्रोप्लास्टी तकनीक से युवक की पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी मूत्रनली (यूरेथ्रा) का पुनर्निर्माण किया गया। डॉक्टर्स के अनुसार, ये न सिर्फ एमवायएच बल्कि राज्य के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इस तरह की पहली सफल सर्जरी है। डॉक्टर्स के अनुसार, मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है।

सड़क हादसे के बाद से भटक रहा था पीड़ित

बताया जा रहा है कि, पीड़ित शख्स बीत करीब ढाई साल पहले एक सड़क हादसे का शिकार होने के बाद से इस समस्या से खासा परेशान था। उसकी मूत्रनली पूरी तरह नष्ट हो गई थी। इसके बाद वो विभिन्न अस्पतालों में उपचार के लिए भटका। कई प्रकार की प्रक्रियाएं की गईं, लेकिन कहीं भी सफलता नहीं मिली। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उसे लंबे समय तक सुप्राप्यूबिक कैथेटर (एसपीसी) के सहारे रहना पड़ रहा था। युवक एमवायएच पहुंचा, जहां यूरोलॉजी विभाग की टीम ने विस्तृत जांच और मूल्यांकन किया। जांच में पाया गया कि पारंपरिक तकनीकों से उपचार संभव नहीं है और मूत्रनली का पुनर्निर्माण ही एकमात्र विकल्प है।

क्या है एंटेरो-यूरेथ्रोप्लास्टी?

एंटेरो-यूरेथ्रोप्लास्टी अत्यधिक विशेषज्ञता वाली पुनर्निर्माण सर्जरी है। इसका उपयोग उन मरीजों में किया जाता है, जिनकी मूत्रनली लंबे हिस्से में क्षतिग्रस्त, नष्ट या अवरुद्ध हो चुकी हो। इस प्रक्रिया में आंत के एक हिस्से पर सिग्मॉइड कोलन या इलियम को उसकी रक्त आपूर्ति के साथ सुरक्षित निकालकर क्षतिग्रस्त हिस्से के स्थान पर प्रत्यारोपित किया जाता है। इसमें यूरोलॉजी और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी से जुड़ी जटिलताओं का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। देश के चुनिंदा उच्च स्तरीय केंद्रों में ही इस तरह की सर्जरी नियमित रूप से की जाती है।

बहु-विषयक टीम ने निभाई अहम भूमिका

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के मार्गदर्शन में यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक हुआ। नेतृत्व यूरोलॉजिस्ट डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने किया। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी जैन और उनकी टीम ने ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Published on:
24 Jun 2026 07:58 am