MP News: देश के सबसे स्वच्छ शहर का दावा करने वाला इंदौर दूषित पानी से फैली बीमारी के सामने बेनकाब हो रहा है। उल्टी-दस्त से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा, अस्पतालों में गंभीर मरीज जूझ रहे हैं।
Indore water contamination case: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने हो रही मौतों का सिलसिला नहीं रुक रहा है। उल्टी-दस्त से 22वीं मौत हो गई। नयापुरा जीवन की फेल में रहने वाली 59 साल की कमला बाई ने एमवाय अस्पताल (MY Hospital) की आइसीयू में दम तोड़ दिया। एक माह पहले ही वह पति तुलसीराम के साथ मनोज कुमार के मकान में रहने आई थी।
6 जनवरी को उल्टी-दस्त से हालत बिगड़ी तो भागीरथपुरा (Bhagirathpura) की संजीवनी क्लीनिक में दिखाया। यहां से दवा देकर उसे भेज दिया। बाद में क्षेत्र में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी ओआरएस के पैकेट व गोलियां दी। 7 जनवरी को हालत ज्यादा बिगड़ी तो एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया। यहां 9 जनवरी को मौत हो गई। पति-पत्नी दोनों मजदूरी करते थे। (MP News)
डॉक्टरों ने प्रथम दृष्टया मौत का कारण क्रोनिक किडनी डिसीज बताया है। विशेषज्ञों की मानें तो लगातार हो रही मौतों का कारण किडनी और लिवर खराब होना भी है, लेकिन इसके लिए भी दूषित पानी जिम्मेदार है। लगातार लोगों को उल्टी-दस्त हो रहे हैं। इससे पानी की मात्रा कम हो रही है। इससे कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों की किडनी-लिवर तक खराब हो रही है।
कमला बाई की मौत पर एमवाय अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वह पहले से क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित थी। भागीरथपुरा में आउटब्रेक से पहले उसे डायलिसिस की सलाह दी गई थी। इसके बाद भी उसने नियमित रूप से नहीं कराया। महिला को उल्टी-दस्त होने पर नहीं, बढ़ते हुए यूरेमिक सीजर के कारण भर्ती किया था। चिकित्सकीय रूप से यह मामला दूषित पानी से जुड़े आउटब्रेक से जुड़ा हुआ नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद मामले में स्थिति स्पष्ट करने के लिए पोस्टमार्टम कराया गया है।
अभी विभिन्न अस्पतालों में डायरिया के 40 मरीज भर्ती हैं। इनमें 12 से ज्यादा आइसीयू में हैं। 4 मरीज वेंटिलेटर पर बताए जा रहे हैं। इस बीच रविवार को संजीवनी क्लीनिक पर 30 नए मरीज पहुंचे। इनमें 8 को डायरिया निकला। (MP News)