इंदौर

जल गंगा संवर्धन अभियान : बारिश की हर बूंद सहेजने की तैयारी में इंदौर, जानें प्लान

Jal Ganga Samvardhan Abhiyan : जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान को नई रफ्तार मिली है। 8400 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए। 30 वाटर रिचार्ज शॉफ्ट भी तैयार। बंद बोरवेल भी बने भूजल संवर्धन का माध्यम।
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Jal Ganga Samvardhan Abhiyan
Jal Ganga Samvardhan Abhiyan (बारिश की हर बूंद सहेजने की तैयारी में इंदौर Photo Source- Patrika)

Indore News : इस बार पड़ी भीषण गर्मी में जलसंकट की समस्या को देखते हुए मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम ने बरसात के पानी से भूजल बढ़ाने पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके चलते शहर में अभी तक जहां 8400 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लग गए और 30 वाटर रिचार्ज शॉफ्ट बन गए हैं, वहीं बंद बोरवेल से भी जमीन में पानी पहुंचाने की कवायद चल रही है। इसके साथ ही रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर जुर्माना वसूल किया जा रहा है।

भीषण गर्मी के चलते जमीन के अंदर पानी और बोरवेल सूख गए थे। ऐसे में शहर की जनता को जलसंकट का सामना करना पड़ा था। यह देखते हुए निगम ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बरसात का पानी जमीन में उतारने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की प्लानिंग करने के साथ टारगेट फिक्स कर दिया है। टारगेट के हिसाब से शहर में इस साल 15000 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना है, जिसमें से 8400 लग चुके हैं। इसके साथ ही 200 वाटर रिचार्ज शॉफ्ट बनाना है, जिसमें से 30 बन चुकी हैं। 13 वाटर रिचार्ज सॉफ्ट बनाने का काम चल रहा है। साथ ही, 300 बंद सरकारी बोरवेल को रिचार्ज शॉफ्ट में तब्दील करने का काम चल रहा है। अभी तक 25 बंद बोरवेल को रिचार्ज शॉफ्ट में बदल दिया गया है।

महापौर खुद कर रहे मॉनिटरिंग

निगम वाटर रिचार्ज शॉफ्ट सीएसआर के तहत बनवा रहा है। इससे निगम का एक रुपया नहीं लग रहा है। संगम नगर स्थित चाणक्य और मोरसरी उद्यान परिसर में बड़े रिचार्ज शॉफ्ट बनाए गए हैं। इससे उद्यान में पानी भरने की समस्या दूर हो गई है। गौरतलब है कि निगम के 22 जोन पर तैनात बिल्डिंग अफसर (बीओ) और बिल्डिंग इंस्पेक्टर (बीआइ) के साथ जोनल अफसर (जेडओ) को रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का टारगेट दिया गया है। इसके साथ ही, टारगेट के हिसाब से काम हो रहा या नहीं इस पर नजर रखने के लिए जोनवार जिम्मेदारी अपर आयुक्तों को दी गई है। जल संरक्षण के कामों की मॉनिटरिंग महापौर पुष्यमित्र भार्गव और गिगमायुक्त क्षितिज सिंघल कर रहे हैं।

अगली गर्मी में नहीं होगी दिक्कत

हर साल गर्मी के दिनों में बोरवेल सूख जाते हैं। इस कारण शहर के उन इलाकों में पानी की किल्लत पैदा हो जाती है, जहां पर नर्मदा की सह्रश्वलाय नहीं है। गर्मी में बोरवेल न सूखे और पानी की समस्या नहीं हो। इसके लिए ही निगम शहर में बोरवेल को रिचार्ज रखने के साथ गिरते भू-जल को बढ़ाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के काम में जुटा है। अफसरों दावा है कि रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने के लिए चल रहे अभियान से अगली गर्मी में लोगों को बोरवेल से पानी मिलने में दिक्कत ज्यादा नहीं होगी।

अब तक 70 भवनों पर कार्रवाई

निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाने वाले तकरीबन 70 भवनों पर कार्रवाई की है। साथ ही 2 लाख रुपए के आसपास जुर्माना वसूल किया है।

जलभराव का होगा समाधान

निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वाटर रिचार्ज शॉफ्ट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम एवं अन्य जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इन प्रयासों से बरसात के पानी का अधिकतम संरक्षण सुनिश्चित होगा। भूजल स्तर में वृद्धि होगी और जलभराव जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान भी होगा। इसलिए शहर की जनता से आग्रह है कि अपने भवनों एवं परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित कर जल संरक्षण अभियान में सहभागिता करें।

Published on:
24 Jun 2026 01:59 pm