JEE Advance Result 2026: कम रैंक आने पर भी खत्म नहीं होते मौके, नए आइआइटी और कई ब्रांच बन सकते हैं बड़ा विकल्प, एक्सपर्ट्स से जानें इस बार कितना रह सकता है कटऑफ
JEE Advance Result 2026: जेईई एडवांस की परीक्षा खत्म होने के साथ ही अब लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की नजर रिजल्ट और कटऑफ पर है। परीक्षा देने वाले छात्र यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कितने अंक पर क्वालिफाई किया जा सकेगा और किस रैंक पर किस आइआइटी में एडमिशन मिलने की संभावना रहेगी। इस साल परीक्षा का आयोजन आइआइटी रुड़की ने किया है और रिजल्ट (JEE Advance Result 2026) 1 जून को जारी किया जाएगा। इसके बाद जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी (जोसा) की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके जरिए देशभर के आइआइटी, एनआइटी और अन्य तकनीकी संस्थानों में प्रवेश दिए जाएंगे।
कुछ इंजीनियरिंग ब्रांच ऐसी भी हैं, जहां कम्यूटर साइंस की तुलना में कम प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। इनमें माइनिंग इंजीनियरिंग, मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग, ओशन इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और पॉलिमर साइंस जैसे कोर्स शामिल हैं। आइआइटी खडग़पुर और आइआइटी धनबाद में माइनिंग और संबंधित कोर्स पिछले सालों में अपेक्षाकृत ज्यादा रैंक तक उपलब्ध रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया, पिछली बार के मुकाबले इस बार फिजिक्स का पेपर (JEE Advance Result 2026) कठिन रहा। मैथ्स और केमिस्ट्री आसान से मध्यम स्तर की रही। पेपर का यही स्तर कटऑफ तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। हर साल जेईई एडवांस का कटऑफ परीक्षा की कठिनाई, कुल सीटों और छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर बदलता है। पिछले कुछ सालों में इसमें काफी उतार-चढ़ाव भी देखा गया है।
विशेषज्ञों और पिछले सालों के ट्रेंड के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ 360 में से करीब 90 से 100 अंक तक रह सकता है। यह कुल अंकों का लगभग 26 से 28 प्रतिशत होगा। ईडबल्यूएस वर्ग के लिए करीब 83 से 90 अंक, ओबीसी-एनसीएल के लिए 75-80 रहने की संभावना है। एससी-एसटी और पीडबल्यूडी छात्रों के लिए यह आंकड़ा लगभग 455 0 अंक तक रह सकता है। हालांकि शिक्षा विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि यह केवल अनुमान है। वास्तविक कटऑफ रिजल्ट जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
2021 व 2022 में क्वालिफाइंग कटऑफ (JEE Advance Result 2026) काफी कम था। उस समय छात्रों को कुल अंकों के लगभग 15 से 17 प्रतिशत अंक लाकर क्वालिफाई करने का मौका मिल गया था। इसके बाद 2023 और 2024 में कटऑफ तेजी से बढ़ा और यह 30 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया। 2025 में इसमें कुछ गिरावट दर्ज की गई और कटऑफ लगभग 20 से 21 प्रतिशत के आसपास रहा।
इंदौर के विशेषज्ञ मुकेश पोरवाल का कहना है कि जेईई एडवांस (JEE Advance Result 2026) का कटऑफ पार करना केवल पहला चरण है। इससे जोसा काउंसलिंग में शामिल होने का मौका मिलता है, लेकिन पसंदीदा आइआइटी और ब्रांच पाने के लिए अच्छी रैंक जरूरी है। आइआइटी बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर और खडग़पुर जैसे पुराने संस्थान में कम्प्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (सीएसई) की सीटों के लिए सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा होती है। यहां एडमिशन पाने के लिए छात्रों को बहुत अच्छी रैंक लानी पड़ती है। कई बार छात्र कटऑफ तो क्लियर कर लेते हैं, लेकिन रैंक कम होने के कारण उन्हें पसंदीदा ब्रांच नहीं मिल पाती।
काउंसलिंग विशेषज्ञों के अनुसार, कम रैंक आने का मतलब यह नहीं कि आइआइटी में प्रवेश की संभावना खत्म हो गई। जोसा के पिछले सालों के आंकड़े बताते हैं कि कई नए आइआइटी में ज्यादा रैंक (JEE Advance Result 2026) तक सीटें उपलब्ध रहती हैं। आइआइटी पलक्कड़, धारवाड़, भिलाई, जम्मू व तिरुपति जैसे आइआइटी में मैकेनिकल, सिविल, केमिकल, इंजीनियरिंग फिजिक्स, मटेरियल साइंस और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्स अधिक रैंक तक मिल जाते हैं।