
Indore Junior Engineer Bribery Case: मध्य प्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त (Lokayukta Action) रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत (Bribe) लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला इंदौर जिले का है जहां बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर को लोकायुक्त इंदौर की टीम ने 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है।
इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में इंदौर के कुलकर्णी नगर में रहने वाले शिवप्रकाश बसवाल ने शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया था कि बिजली कंपनी के सुखलिया जोन में पदस्थ जूनियर इंजीनियर नमेश कुमार भोंडेकर निवासी निधिवन कॉलोनी उनसे 80 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है। फरियादी ने शिकायत में बताया था कि वो अपनी अंबे नगर स्थित होटल में सोलर पैनल लगवाना चाहता है और इसी की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में जूनियर इंजीनियर नमेश कुमार भोंडेकर उससे 80 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है।
लोकायुक्त टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर रिश्वतखोर जूनियर इंजीनियर नमेश कुमार भोंडेकर को पकड़ने की योजना बनाई। शनिवार को लोकायुक्त टीम ने रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 40 हजार रुपये देने के लिए फरियादी शिवप्रकाश को रिश्वतखोर जूनियर इंजीनियर के पास भेजा। जूनियर इंजीनियर नमेश कुमार भोंडेकर ने रिश्वत की रकम देने के लिए फरियादी को अपने ऑफिस में बुलाया। वहां पहले से लोकायुक्त की टीम सादे कपड़ों में मौजूद थी और जैसे ही जूनियर इंजीनियर ने फरियादी से रिश्वत के रुपये लिए और टेबिल के दराज में रखे तभी लोकायुक्त टीम ने उसे रंगहाथों पकड़ लिया। जूनियर इंजीनियर करीब 3 साल से सुखलिया जोन पर कार्यरत है। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की है।
इधर सिंगरौली जिले में भी रीवा लोकायुक्त टीम ने शनिवार को कार्रवाई की है। रीवा लोकायुक्त टीम ने सिंगरौली जिले के बरगवां वन परिक्षेत्र की ओबरी वन चौकी में पदस्थ वन रक्षक अखिलेश शुक्ला को 2 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोपी कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर ले जाने की अनुमति देने के बदले प्रतिदिन 2 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था। जिसकी शिकायत ट्रैक्टर मालिक ने 16 जुलाई को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में दर्ज कराई थी।