
Indore news: काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा एक में बड़े पैमाने पर अवैध नशे का कारोबार चल रहा है जिसको लेकर सियासत गरमा गई है। कल भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन और पार्षद रहे मनोज मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या कार्यकर्ता डीसीपी को ज्ञापन देने पहुंचे। पहले ज्ञापन देने 15 पार्षद जाने वाले थे, लेकिन मंत्री पुत्र ने सभी को व्यक्तिगत फोन लगाकर नहीं जाने का आग्रह किया। मजेदार बात ये है कि पहले तो रैली की तैयारी थी, लेकिन संगठन की समझाइश के बाद उसे निरस्त किया गया था। शहर के पश्चिमी क्षेत्र में नशे का अवैध बड़ा कारोबार है। बाणगंगा, चंदन नगर, कंडिलपुरा और मल्हारगंज के आसपास का क्षेत्र तो गढ़ है। यहां अपराधियों की फेहरिस्त में कई ऐसे भी नाम हैं जिन पर अवैध शराब व अन्य मादक पदार्थों के बचने के कई मुकदमे दर्ज हैं।
जनता की लगातार शिकायत के बाद कल भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन व पार्षद रहे मनोज मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी डीसीपी नरेंद्र रावत से मिलने पहुंचे। चर्चा के दौरान सत्तन ने सिस्टम पर जमकर निशाना साधा और सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि सरकारी ठेकों के ज्यादा भीड़ तो अवैध शराब कारोबारियों के यहां लग रही है। बेचने वालों के हौसले बुलंद हैं। जहां पर अवैध शराब बिकती है वहां घटना व दुर्घटना होने का ज्यादा अंदेशा रहता है।
सख्ती कर रोकना चाहिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद है। चर्चा के दौरान डीसीपी रावत का कहना था कि अवैध नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्रवाई हो रही है। चेकिंग कर हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे और संरक्षण देने वालों को भी नहीं छोड़ेंगे। भाजपाइयों ने साफ कर दिया कि अवैध नशे का काम बंद नहीं हुआ तो जनता खुद बड़ा आंदोलन कर देगी।
एक नंबर विधानसभा के अधिकांश पार्षद ज्ञापन देने जाने वाले थे जिसकी भनक लगते ही मंत्री विजयवर्गीय के बेटे व विधायक रहे आकाश विजयवर्गीय सक्रिय हो गए। उन्होंने अपने फोन से सभी पार्षदों को एक-एक कर बात की। आग्रह किया कि प्रदर्शन में न जाकर हम अफसरों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे। अधिकांश पार्षदों ने क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार संचालित होने पर दर्द बयान किया। बड़ी बात ये है कि आकाश ने कई पार्षदों से पहली बार खुद के फोन से बात की नहीं तो सहयोगी बात कराते थे।
अवैध नशे के कारोबार को बंद कराने के लिए भाजपाइयों के ज्ञापन देने की बात को विजयवर्गीय ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था। उन्हें मालूम था कि सभी पार्षद चले गए तो क्षेत्र से पकड़ कमजोर हो जाएगी और बड़ी बगावत का आगाज हो जाएगा। इसके अलावा चुनाव में दावा किया था कि अवैध नशे के कारोबार को वे बंद कराएंगे और ऐसा करने वालों को जमीन में गाड़ देंगे।