इंदौर

910 करोड़ की रेल लाइन बिछेगी, काटे जाएंगे 1 लाख पेड़, MP से तेलंगाना तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी

प्रोजेक्ट की रफ्तार अब जंगलों पर भारी पड़ने वाली है। करीब एक लाख पेड़ कटेंगे, जबकि भरपाई में 10 लाख पौधे लगाने की बात है। हैरानी यह कि मुआवजा योजना पर अब तक रेलवे के पास स्पष्ट रोडमैप नहीं है।
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Feb 14, 2026
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Mhow-Balwara rail line construction (फोटो- Patrika.com)

MP News: महू-खंडवा ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट के महू-बलवाड़ा रेल लाइन (Mhow-Balwara rail line construction) महत्वपूर्ण है। रेलवे ने काम शुरू करने के पहले वन विभाग के साथ मिलकर बाधक पेड़ों की गिनती की है। वन क्षेत्र के करीब एक लाख पेड़ बाधक हैं।

इसमें से अधिकांश काटे जाएंगे तो कुछ ट्रांसप्लांट होंगे। पर्यावरण के इस नुकसान की भरपाई होना है। इसका खर्च रेलवे को वहन करना है, लेकिन ये कैसे होगा इसकी जानकारी अफसरों को नहीं है। यानी अब तक योजना नहीं बनाई गई है। (MP News)

ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट के लिए 910 करोड़ मिले

इंदौर के लिए अहम माने जाने वाले रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट (Mhow-Khandwa broad gauge project) को 2024 के बजट में 910 करोड़ रुपए मिले हैं। 2008 में इस प्रोजेक्ट को विशेष दर्जा मिला है। इसकी लागत करीब 2 हजार करोड़ है। रेलवे ने पातालपानी से बलवाड़ा तक डायवर्टेड रेल लाइन के 468.65 करोड़ के टेंडर जारी किए हैं। इसमें सबसे प्रमुख दो बड़ी सुरंगें भी शामिल हैं। 18 छोटी टनल बनेगी।

4 किमी की टनल का टेंडर भी हो चुका है, लेकिन वन विभाग की अनुमति के कारण प्रोजेक्ट के इस हिस्से पर काम नहीं हो पा रहा था। अब सैद्धांतिक अनुमति मिलने के बाद निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। काम शुरू करने के लिए साइट क्लियर की जाएगी। इसके लिए करीब एक लाख पेट जाएंगे।

बदले में 10 गुना पेड़ लगाने होंगे

वन विभाग के अफसरों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में इंदौर वन मंडल का इंदौर से बड़वाह तक का हिस्सा आता है। इस बीच करीब 1 लाख से अधिक पेड़ बाधित हैं। इसके बदले रेलवे जमीन और पौधे लगाने के लिए मुआवजा देगा। एक पेड़ के बदले 10 पौधे लगाए जाएंगे। करीब एक साल में दोनों विभागों ने मिलकर पेड़ों की गिनती की है।

इंदौर से सिकंदराबाद की सीधी कनेक्टविटी

बताया गया, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद पूरे हिस्से में से बचे हुए 156 किलोमीटर के ट्रैक पर गेज कन्वर्जन का काम जल्दी शुरू होगा, क्योंकि बाकी हिस्से में काम हो चुका है। उन्होंने बताया ट्रैक के बन जाने से इंदौर को दक्षिण भारत के प्रमुख शहर सिकंदराबाद से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी साथ ही दिल्ली से इंदौर और इंदौर से सिकंदराबाद जुड़ जाएंगे।

भरपाई की अब तक नहीं बनी योजना

454 हेक्टेयर वन भूमि पर 65 किमी के इस हिस्से में ट्रैक बिछाया जाएगा। अधिग्रहण के लिए रेलवे ने 100.08 करोड वन विभाग को जमा करवा दिए हैं। 18 टनल के जरिए रेलवे ने करीब 17 हजार पेड़ बचाए हैं। एक लाख पेड़ के बदले 10 लाख पेड़ लगाने का खर्च और जमीन रेलवे को उपलब्ध करवाना है, लेकिन रेलवे की ठोस योजना सामने नहीं आई है। रेलवे पीआरओ मुकेश कुमार ने बताया, रेलवे पेड़ों की भरपाई के लिए राशि देगा। इसकी योजना के बारे में जानकारी नहीं है।

ऐसे समझे ये प्रोजेक्ट

  • 910 करोड़ रुपए 2024 के बजट में मिले
  • 02 हजार करोड़ (करीब) है लागत
  • 468.65 करोड़ के टेंडर डायवर्टेड रेल लाइन के लिए जारी
  • 18 छोटी टनल बनेगी। चार किमी लंबी टनल का टेंडर भी हो चुका है। (MP News)
Updated on:
14 Feb 2026 06:38 am
Published on:
14 Feb 2026 01:33 am