इंदौर

NFHS-6 की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, इंदौर में बच्चों का ‘कद’ तो ठीक, लेकिन घट रहा ‘वजन’

NFHS-6 Report: इंदौर में बच्चों की औसत ऊंचाई में सुधार हुआ है, ठिगने बच्चों का अनुपात 28.7% से घटकर 22.8% रह गया। वहीं कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा 24.9% से बढ़कर 30.8% हो गया है, जो चिंता का विषय है।
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Sep 23, 2026
कम हो रहा बच्चों का वजन प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
कम हो रहा बच्चों का वजन प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Indore news: बच्चों की सेहत को लेकर मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में तस्वीर राहत देने वाली है। बच्चों का कद तो सुधर रहा है, लेकिन वजन के मामले में स्थिति गड़बड़ा रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों में उम्र के हिसाब से कम लंबाई वाले (ठिगने) बच्चों का अनुपात 28.7 प्रतिशत से घटकर 22.8 प्रतिशत रह गया है। इससे साफ है कि औसत हाईट में 6 फीसदी का सुधार हो रहा है। अब बात करें उम्र के हिसाब से कम वजन वाले बच्चों (अंडरवेट) की तो ये आकड़ा गड़बड़ है जो 24.9 से बढ़कर 30.8 फीसदी हो गया। 100 बच्चों में पहले 29 बच्चे उम्र के हिसाब से छोटे कद वाले थे, अब ये संख्या करीब 23 रह गई है और कम वजन वाले बच्चों की संख्या 25 से बढ़कर 31 हो गई।

कद घटने का मतलब सीधे कुपोषण नहीं

स्टंटिंग को लंबे समय से चली आ रही पोषण की कमी और बच्चे के विकास से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी बच्चे का कद कम है तो उसकी वजह सिर्फ कुपोषण है। मां का गर्भावस्था के दौरान पोषण, बच्चे का जन्म के समय वजन शुरुआती वर्षों का खान-पान, बार-बार होने वाली बीमारी और संक्रमण जैसी कई वजहें बच्चे की लंबाई पर असर डालती हैं, इसलिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इंदौर में कम कद वाले बच्चे सिर्फ कुपोषण की वजह से हैं।

कद ठीक, फिर भी वजन कम

दूसरी तरफ अडरवेट का होना अलग तस्वीर दिखाता है। इसमें बच्चे के वजन की तुलना उसकी उम्र से की जाती है। यानी बच्चा उम्र के हिसाब से सामान्य लंबाई का हो सकता है, लेकिन उसका वजन कम हो सकता है। इंदौर में यही संकेतक बढ़ा है। स्टंटिंग में सुधार के बावजूद अंडरवेट बढऩा सवाल को जन्म देता है कि आखिर बच्चों का वजन क्यों कम हो रहा है?

अब सिर्फ कद नहीं, वजन की भी पड़ताल

वजन कम होने की वजह तलाशने के लिए बच्चों के रोज के भोजन, आहार की गुणवत्ता और विविधता, बार-बार होने वाली बीमारियों, संक्रमण, एनीमिया और परिवार की आर्थिक स्थिति को साथ में देखना होगा। आंकड़े साफ बता रहे हैं कद के मोर्चे पर इंदौर ने सुधार किया है, लेकिन वजन की चुनौती बढ़ गई है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि कितने बच्चे कुपोषित हैं, बल्कि यह भी है कि कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा बढ़ा क्यों।

Updated on:
23 Sept 2026 01:29 pm
Published on:
23 Sept 2026 01:29 pm