इंदौर

रेलवे की 100 साल पुरानी विरासत खोज रहा PMO, इंदौर से मांगी ऐतिहासिक धरोहरों की फेहरिस्त

Railway Heritage Detail : इंदौर स्टेशन का जीआरपी थाना और 150 साल पुराना, पातालपानी - कालाकुंड हेरिटेज ट्रैक होंगे शामिल।
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Railway Heritage Detail
Railway Heritage Detail (रेलवे की 100 साल पुरानी विरासत खोज रहा PMO Photo Source- Patrika)

Indore News :मध्य प्रदेश के इंदौर जिले की रेलवे विरासत अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ ) के रिकॉर्ड में दर्ज होने जा रही है। पीएमओ ने रेलवे से देशभर में 100 साल या उससे अधिक पुरानी रेलवे इमारतों, ट्रैक और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी मांगी है। रतलाम मंडल से यह पत्र इंदौर पहुंचने के बाद रेलवे अधिकारियों ने ऐसी विरासतों की जानकारी जुटाना शुरू कर दी है।

इंदौर में अब 100 साल पुरानी रेलवे इमारतें गिनती की ही बची हैं। रेलवे को भेजे गए निर्देश के मुताबिक, केवल इमारत या ट्रैक का नाम बताना पर्याप्त नहीं होगा। इसकी पूरी वीडियोग्राफी भी करानी होगी। साथ ही आर्कियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआइ ) का प्रमाण पत्र भी देना होगा, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित इमारत या रेलवे ट्रैक 100 साल से अधिक पुराना है।

बदलती गईं पुरानी इमारतें

रेलवे एक्सपर्ट नागेश नाम जोशी के अनुसार, इंदौर में पहले मीटर गेज रेलवे लाइन का दौर था। उस समय स्टेशन और रेलवे का पूरा सेटअप उसी हिसाब से तैयार किया गया था। समय के साथ मीटर गेज को ब्रॉडगेज में बदलने और रेलवे के आधुनिकीकरण के कारण पुरानी इमारतों और दूसरे ढांचों का अस्तित्व धीरे - धीरे खत्म होता गया। अब शहर में पुरानी रेलवे विरासत के नाम पर बेहद कम संरचनाएं बची हैं।

जीआरपी थाना कभी था राजा का वीआइपी रूम

उन्होंने बताया की इंदौर रेलवे स्टेशन पर वर्तमान में जहां जीआरपी थाना संचालित हो रहा है, वह इमारत भी करीब 100 साल पुरानी बताई जाती है। इस इमारत का इतिहास काफी दिलचस्प है। जानकारों के मुताबिक पुराने समय में यहां तत्कालीन राजा का वीआइपी रूम हुआ करता था। राजा इसी स्थान पर बैठकर ट्रेन का इंतजार किया करते थे। अब इसी ऐतिहासिक इमारत में जीआरपी थाना संचालित हो रहा है।

150 साल पुराना ट्रैक भी विरासत

जोशी के अनुसार, इंदौर में रेलवे की सबसे खास विरासत पातालपानी- कालाकुंड हेरिटेज ट्रैक है। यह मीटर गेज दौर की यादों को आज भी अपने साथ समेटे हुए है और इसकी उम्र करीब 150 साल बताई जाती है। पीएमओ के निर्देश के बाद अब इस ट्रैक और पुरानी इमारतों का दस्तावेजीकरण कर रेलवे इनकी ऐतिहासिक पहचान को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करने की तैयारी कर रहा है।

Updated on:
08 Aug 2026 02:07 pm
Published on:
08 Aug 2026 02:07 pm