
PM Awas Yojana 2.0: प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के दूसरे चरण में शहर में करीब 8100 नए आवास बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सनावादिया, सिंदोड़ा, रंगवासा और उमरीखेड़ा सहित विभिन्न स्थानों का चयन किया गया है। हालांकि योजना के पहले चरण के कई प्रोजेक्ट अब भी अधूरे पड़े हैं।
कहीं हितग्राहियों को बुकिंग के डेढ़ साल बाद भी मकान का कब्जा नहीं मिला है तो कहीं प्रोजेक्ट बनकर तैयार हैं, लेकिन आवश्यक मंजूरियों के अभाव में उनकी बुकिंग तक शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में दूसरे चरण की तैयारी के बीच पहले चरण की प्रगति और योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे अधिक शिकायतें सतपुड़ा परिसर परियोजना को लेकर सामने आ रही हैं। यहां फ्लैट बुक कराने वाले कई हितग्राही एक वर्ष से अधिक समय से कब्जे का इंतजार कर रहे हैं। यह परियोजना पहले से ही करीब डेढ़ से दो वर्ष की देरी का शिकार है। प्रारंभिक निर्माण एजेंसी के काम बीच में छोड़ने और दिवालिया घोषित होने के बाद परियोजना ठप हो गई थी। इसके बाद नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे कई महीने और निकल गए।
सतपुड़ा परिसर का निर्माण कार्य वर्तमान में गुजरात की एक कंपनी कर रही है। आरोप है कि यह एजेंसी भी निर्माण कार्य को अपेक्षित गति नहीं दे सकी है। इसके बावजूद पीएम आवास योजना के अरावली परिसर में प्रस्तावित व्यवसायिक प्रोजेक्ट का कार्य भी इसी कंपनी को सौंप दिया गया है। इससे योजना के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है। हितग्राहियों का कहना है कि जब एक परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पा रही है तो उसी एजेंसी को अन्य काम सौंपने का औचित्य समझ से परे है।
योजना के अंतर्गत निर्मित मंदार और क्षिप्रा परिसर की स्थिति भी अलग नहीं है। दोनों प्रोजेक्ट लगभग तैयार बताए जा रहे हैं, लेकिन अब तक इनकी बुकिंग शुरू नहीं हो सकी है। कारण यह है कि परियोजनाओं को रेरा की मंजूरी नहीं मिली है। बिना रेरा अनुमोदन के न तो बुकिंग की जा सकती है और न ही आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। ऐसे में करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए आवास अभी भी उपयोग से बाहर हैं।
इस बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के दूसरे चरण की रूपरेखा तैयार की जा रही है। योजना के तहत सनावादिया, सिंदोड़ा, रंगवासा, उमरीखेड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में करीब 8100 नई आवासीय इकाइयों के निर्माण का प्रस्ताव है। हालांकि पहले चरण के लंबित प्रोजेक्टों और हितग्राहियों की समस्याओं को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि क्या नए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले पुराने प्रोजेक्टों को पूरा करना प्राथमिकता नहीं होना चाहिए।