
Indore news: रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर पहुंचकर किसी मूक-बधिर यात्री को टिकट काउंटर, प्लेटफॉर्म, बस या ट्रेन की जानकारी चाहिए या किसी अन्य जगह कोई मदद तो उसके सामने सबसे बड़ी परेशानी संवाद की होती है। वह अपनी बात बताना चाहता है, लेकिन सामने वाला उसकी बात समझ नहीं पाता। ऐसे में कई बार उसे इशारों के भरोसे रहना पड़ता है या किसी दूसरे यात्री की मदद तलाशनी पड़ती है। अब मूक-बधिरों की राह में अब 'भाषा' बाधा नहीं बनेगी। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर स्थिति देखी। रेलवे स्टेशन पर कर्मचारी तो मिले, लेकिन मूक-बधिर यात्रियों के लिए अलग से संवाद सुविधा नजर नहीं आई। बस स्टैंड पर स्थिति और मुश्किल रही। यहां ऐसा कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला जो संकेत भाषा समझकर ऐसे यात्रियों की मदद कर सके।
अब केंद्र सरकार इस परेशानी को तकनीक के जरिए दूर करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित प्रणाली में क्यूआर कोड के जरिए मूक-बधिर यात्री अपने मोबाइल फोन पर जरूरी जानकारी हासिल कर सकेगा। इसके साथ ऐसा इंटरफेस तैयार किया जा रहा है, जो टेक्स्ट को आवाज और आवाज को टेक्स्ट में बदल सकेगा। इससे यात्री अपनी बात लिखकर सामने वाले तक पहुंचा सकेगा और कर्मचारी की कही बात टेक्स्ट के रूप में उसके सामने आ सकेगी।
दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से इस प्रणाली को विकसित किया जा रहा है। शुरुआती डेवलपमेंट के बाद इसमें कुछ कमियां सामने आई थीं। सबसे बड़ी समस्या टेक्स्ट और आवाज को कन्वर्ट करने में लगने वाला समय था। भारत में अलग-अलग भाषाएं और बोलियां होने के कारण बहुभाषी इंटरफेस विकसित करने में भी तकनीकी चुनौतियां सामने आईं। इन्हें दूर करने के लिए आईटी विशेषज्ञ काम कर रहे हैं। पुरोहित ने दिल्ली जाकर इस प्रणाली को सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं से जोडऩे के लिए चल रहे काम को भी देखा है।
मूक-बधिर यात्री काउंटर पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करेगा। या फिर वह एप्लीकेशन में अपनी बात टेक्स्ट के रूप में लिख सकेगा, जिसे सिस्टम आवाज में बदल देगा। दूसरी ओर कर्मचारी की कही बात आवाज से टेक्स्ट में बदलकर यात्री के मोबाइल फोन स्क्रीन पर दिखाई देगी। इससे टिकट, प्लेटफॉर्म, बस-ट्रेन और गंतव्य जैसी सामान्य जानकारियों के लिए बार-बार किसी दूसरे व्यक्ति की मदद लेने की जरूरत कम हो सकेगी। उद्देश्य सिर्फ सुविधा नहीं, आत्मनिर्भरता है। जिस यात्री को अभी एक छोटी-सी जानकारी के लिए भी किसी अजनबी का इंतजार करना पड़ता है, तकनीक उसे अपनी यात्रा के फैसले खुद लेने में मदद कर सकती है।