
Indore News : आरटीओ की सेवाओं में बदलाव और निजीकरण की चर्चाओं के बीच अब च्वाइस नंबर की व्यवस्था बदलने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था में वाहन मालिक अपनी पसंद का नंबर पहले से रिजर्व करा सकेंगे। इसके लिए निर्धारित शुल्क देना होगा। इसका मकसद डीलर या एजेंट द्वारा नंबर पहले ही लॉक कर लेने की स्थिति खत्म करना है।
सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के अधिकारियों ने पिछले दिनों दिल्ली मुख्यालय से भी चर्चा की है। मौजूदा समय में दो और चार पहिया वाहनों के वीआइपी नंबरों का आवंटन बिडिंग के जरिए होता है। वहीं च्वाइस नंबरों की अलग श्रेणी है। इसमें ऐसे नंबर आते हैं, जिन्हें वाहन मालिक अपनी पसंद के कारण लेना चाहते हैं।
अभी इन नंबरों को लेने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और वाहन डीलर के माध्यम से आवेदन किया जाता है। परेशानी तब होती है, जब किसी पसंदीदा नंबर को जिले का कोई डीलर या एजेंट पहले ही पोर्टल पर लॉक कर देता है। बाद में वाहन मालिक अपनी नई गाड़ी के लिए वही नंबर लेना चाहता है तो स्पेशल नंबर पोर्टल पर नंबर पहले से बुक दिखाई देता है।
नई व्यवस्था के प्रस्ताव में वाहन मालिक को अपना पसंदीदा नंबर पहले से अपने नाम पर रिजर्व कराने का विकल्प देने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए निर्धारित अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है। इससे वाहन खरीदने से पहले ही पसंदीदा नंबर सुरक्षित हो सकेगा और डीलर या एजेंट द्वारा उसे पहले लॉक करने की स्थिति नहीं बनेगी। अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाना है।
सरकारी महकमें में सबसे बदनाम विभागों में आरटीओ का नाम सबसे उपर आता है। यहां पर कोई भी काम बिना व्यवहार के नहीं होता है। जिसको लेकर कई बार शिकवें-शिकायतें भी हुई, लेकिन कुएं में भांग मिली होने जैसे हाल होने पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। केंद्र सरकार ने अब विभाग पर नकेल कसना शुरू कर दिए। धीरे-धीरे कई काम अब ऑनलाइन और निजी हाथों में दे दिए हैं। इसमें सबसे बड़ा झटका विभाग को फिटनेस की व्यवस्था के निजीकरण से लगा था। इस काम में एजेंटों के साथ विभाग की अच्छी सेवा होती थी।