SIR: एसआइआर का दूसरा चरण 4 फरवरी को पूरा होने वाला है, ऐसे में इस सीमित समय में बीएलओ द्वारा इन सभी मतदाताओं के घर जाकर त्रुटि सुधार कर पाना संभव नहीं है...
SIR: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान फॉर्म भरते समय गलत जानकारी देने या 2003 की मतदाता सूची से गलत मिलान वाले मतदाताओं पर निर्वाचन विभाग की नजर और सख्त हो गई है। निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर से की गई मैपिंग में जिले के 5 लाख 79 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड में तार्किक और तथ्यात्मक त्रुटियां सामने आई है। इन मतदाताओं की मैपिंग तो हो चुकी है, लेकिन विवरणों में गड़बड़ी के कारण इन्हें संदिग्ध श्रेणी में रखा है।
अब चूंकि एसआइआर का दूसरा चरण 4 फरवरी को पूरा होने वाला है, ऐसे में इस सीमित समय में बीएलओ द्वारा इन सभी मतदाताओं के घर जाकर त्रुटि सुधार कर पाना संभव नहीं है। इसी कारण निर्वाचन विभाग ने रणनीति बदली है और अब इन सभी 5.79 लाख मतदाताओं को सीधे नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नोटिस के बाद मतदाताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे या किसी अन्य प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। इस संबंध में निर्वाचन आयोग से अभी विस्तृत निर्देश जारी नहीं हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही आयोग से दिशा-निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, ये 5.79 लाख मतदाता उन 1 लाख 33 हजार 706 मतदाताओं से अलग हैं, जिनकी 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग ही नहीं हो पाई थी। इन मतदाताओं को पहले ही नोटिस दिए जा चुके हैं और उनसे दस्तावेज लेकर सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है यानी जिले में मतदाता सूची से जुड़े मामलों की संख्या अब काफी बढ़ गई है। सुधार व सत्यापन की जिम्मेदारी बीएलओ और एईआरओ को दी गई है।
रिकॉर्ड में सामने आई गड़बड़ियों को दूर करने के लिए पहले कलेक्टर कार्यालय में 11 अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञों की टीम बैठाई गई थी, जो दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड सत्यापन कर रही थी। जिले में नियुक्त 95 एईआरओ पहले से ही 2003 से नो-मैपिंग वाले 1.33 लाख मतदाताओं को नोटिस देने और उनकी सुनवाई में व्यस्त हैं। ऐसे में अब 5.79 लाख त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड वाले मतदाताओं को नोटिस भेजने का अतिरिक्त काम आने से विभाग को अतिरिक्त एईआरओ की नियुक्ति करनी पड़ सकती है।