
Indore news: स्कूल से लौटे बच्चे की भूख मिटाने को घर के खाने की जगह चिप्स, बिस्किट, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, मीठा पेय कितनी बार चुना जा रहा है, इसका असर अब शहर के किशोरों की डाइट में भी दिखाई दे रहा है। एसजीएसआइटीएस के आइटी डिपार्टमेंट के विद्यार्थियों द्वारा कक्षा-8 के किशोरों पर किए गए स्कूल-बेस्ड अध्ययन में सामने आया कि उनकी प्रतिदिन भोजन से मिलने वाली ऊर्जा का औसतन 28% हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से आया।
प्रोसेस्ड फूड की व्यापक श्रेणी को देखें तो यह हिस्सेदारी 67% तक पहुंच गई। यह आंकड़ा किसी एक पैकेट या एक दिन के नाश्ते की कहानी नहीं है। यह संकेत है कि किशोरों के नियमित भोजन में पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कितनी जगह बना चुके हैं। भी शुगर-फैट की मात्रा बताने वाली फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (एफओपीएल) की बहस इंदौर जैसे शहरों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। पैकेट के पीछे या साइड में न्यूट्रिशन चार्ट होता है। इसमें कुल शुगर, फेट, सोडियम, सर्विवंग साइज जैसी जानकारियां होती है। खरीदारी करते कितने लोग इसे पूरा पढ़ते हैं, यह बड़ा सवाल है। इसको देखते हुए एफएसएसएआइ ने पैकेज्ड फूड के सामने चेतावनी लेबलिंग का प्रस्ताव रखा है।
ऊर्जा आंकड़ा है। यानी किशोर भोजन से अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण संकेत 28% जितनी ऊर्जा रोज ले रहे, उसका औसतन एक चौथाई से अधिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड र फूड से था। इस श्रेणी में पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, इंस्टेंट और रेडी-टू-ईट जैसे पैकेजिंग खरीदारी प्रभावित कर सकती उत्पाद होते हैं। इनमें स्वाद, सुविधा व है, लेकिन उपभोक्ता के लिए यह समझना आसान नहीं कि उत्पाद में शुगर, सोडियम या सैचुरेटेड फैट की मात्रा कितनी है।
अध्ययन में प्रोसेस्ड फूड की व्यापक श्रेणी से मिलने वाली ऊर्जा की हिस्सेदारी 67% पाई गई। इसे 28% अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के आंकड़े से अलग समझना जरूरी है। दोनों श्रेणियां समान नहीं हैं। 28% अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी बताता है, जबकि 67% प्रोसेस्ड फूड की व्यापक श्रेणी की। अध्ययन का संकेत यह है कि किशोरों के भोजन में प्रोसेस्ड खाद्य की मौजूदगी काफी अधिक हो चुकी है और उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पादों का है।
व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वे सीएनएनएस 2016-18 में 10-19 वर्ष के 35,856 किशोरों को शामिल किया गया था। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 36% किशोर सप्ताह में एक से अधिक बार पैकेज्ड नमकीन खाते थे, जबकि करीब 22% शुगर-स्वीटेंड बेवरेज लेते थे। ये राष्ट्रीय आंकड़े हैं, इन्हें इंदौर के किशोरों की खपत नहीं माना जा सकता।
28% - रोजाना ऊर्जा का औसत हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से।
67% - प्रोसेस्ड फूड की व्यापक श्रेणी से ऊर्जा की हिस्सेदारी।
फोकस - किशोरों की भोजन संबंधी आदतें और ऊर्जा खपत।
संकेत - पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ किशोरों की नियमित डाइट में महत्वपूर्ण जगह बना रहे हैं।
35,856-10-19 वर्ष के किशोरों का राष्ट्रीय नमूना
36% - सप्ताह में एक से अधिक बार पैकेज्ड नमकीन लेने वाले किशोर।
22% - सप्ताह में शुगर-स्वीटेंड बेवरेज लेने वाले किशोर।
10% से कम रोज फल खाने वाले किशोर।
30% - सप्ताह में कम से कम एक बार फ्राइड फूड लेने वाले किशोर।
18% - रोज हरी पत्तेदार सब्जियां लेने वाले किशोर।
स्कूल के बाय का स्नैक: चिप्स-बिस्किट जैसे तैयार स्नैक्स बच्चों के लिए आसानी से उपलब्ध विकल्प बन गए हैं।
टिफिन का नया विकल्प: इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे पेय सुविधा के कारण बच्चों-किशोरों के बीच आकर्षक विकल्प बनते हैं।
पैकेट पर बड़ा दावा, पीछे छोटा सच: 'मल्टीग्रेन', 'नेचुरल', 'हेल्दी' या 'एनर्जी' जैसे शब्द पूरे पोषण मूल्य की जानकारी नहीं देते।
स्वाद बनाम पोषण: बच्चे अक्सर स्वाद और ब्रांड देखकर उत्पाद चुनते हैं, जबकि नमक, शुगर और फैट की मात्रा पीछे के छोटे अक्षरों में होती है।
बात सिर्फ यह नहीं कि बच्चे चिप्स, बिस्किट या नूडल्स कितनी बार खा रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि इन खाद्य पदार्थों की बढ़ती हिस्सेदारी कहीं दाल, सब्जी, फल, दूध और घर के सामान्य भोजन की जगह तो नहीं ले रही? स्टडी में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से 28% ऊर्जा मिलने का आंकड़ा इसी बदलाव पर ध्यान देने का संकेत है।