
आइडीए अध्यक्ष की कुर्सी, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
Indore news: मालवा-निमाड़ की राजनीति का माहौल बनाने वाले मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में सरकारी पदों पर अब तक कोई राजनीतिक नियुक्ति नहीं हुई है। देखा जाए तो राजनीति उपेक्षा का शिकार हो रही है। ये बात अब भाजपा संगठन को भी समझ में आ रही है जिसके चलते कोर कमेटी में प्रदेश अध्यक्ष ने संकेत दे दिए है। सब कुछ सहीं रहा तो जल्दी ही इंदौर के नेताओं को सत्ता की रेवडिय़ां का स्वाद चखने को मिल सकता है। हाल ही में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इंदौर दौरे पर आए थे। वे मासिक बैठक में शामिल हुए तो बाद में कोर कमेटी में प्रमुख नेताओं से चर्चा की। उनका फोकस सत्ता और संगठन के संतुलन पर था। चर्चा के दौरान उन्होंने दो माह कोर कमेटी की बैठक करने के निर्देश दिए।
इस पर जब नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने बताया कि हम नियमित कर लेते हैं तो उन्होंने पूछ लिया कि प्रभारी मंत्री की मौजूदगी वाली बैठक की बात कर रहा हूं। प्रभारी मंत्री की उपस्थिति में होने वाली बैठक में गंभीर विषयों पर चर्चा होना चाहिए। इस पर बैठक में मौजूद तब एक विधायक ने दबी जुबान से बोल दिया कि मुख्यमंत्री इंदौर के प्रभारी मंत्री है। उन्होंने कहा कि चर्चा कर समय लिया जाना चाहिए ताकि विकास कार्यों को गति दी जा सके। इसके बाद उन्होंने सत्ता में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चा की जिस पर स्थानीय नेताओं ने साफ कर दिया कि अब तक इंदौर में कोई नियुक्त नहीं हुई है। सभी के लिए नाम भेजे जा चुके हैं।
प्रदेशभर में एल्डरमैन घोषित हो गए, लेकिन हमारी सूची आज तक जारी नहीं हुई। इस पर खंडेलवाल ने बताया कि कॉलेजों में जनभागीदारी समिति भी तय हो गई थी तो घोषणा कहां अटक गई। इस पर सभी नेताओं ने अनभिज्ञता जाहिर कर दी। खंडेलवाल का कहना था कि ठीक है मैं पता लगाता हूं कि मामला कहा अटका हुआ है। बड़ी बात ये है कि पूरी बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मौन थे।
इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) बोर्ड का गठन होना है, लेकिन अध्यक्ष को लेकर पेंच उलझा हुआ है। मंत्री विजयवर्गीय चाहते हैं कि उनके कट्टर समर्थक हरिनारायण यादव को बनाया जाए, लेकिन केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर व प्रदेश अध्यक्ष खुद खंडेलवाल चाहते हैं कि सुदर्शन गुप्ता को मौका दिया जाए। इन दोनों के अलावा कमलेश शर्मा, जीतू जिराती और मुकेश राजावत का नाम भी दमदारी से है। खींचतान के कारण यहां भी पेच उलझा हुआ है।
गौरतलब है कि इंदौर से दो नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ है। सावन सोनकर अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष हैं तो प्रताप करोसिया सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष हैं। दोनों की नियुक्ति पांच साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी निगम मंडलों को भंग कर दिया था लेकिन दोनों को नहीं हटाया।
Updated on:
12 Oct 2026 02:32 pm
Published on:
12 Oct 2026 02:32 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
