इंदौर

दौड़ते वाहनों के बीच अचानक सड़क फाड़कर निकल आया पानी, अफसर बोले- टेस्टिंग सफल

Water Burst On Road : गजब की स्मार्ट सिटी! स्मार्ट सोच! स्मार्ट तर्क! 2021 में जिस पाइपलाइन का काम पूरा होना था, हुआ 2023 में, उसके 3 साल बाद अब टेस्टिंग, वो भी इस तरह।
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Water Burst On Road
Water Burst On Road (सड़क फाड़कर निकला पानी Photo Source- Viral CCTV)

Smart City Indore : देश के सबसे स्वच्छ और मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर स्मार्ट सिटी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इसके कार्यों की खराब गुणवत्ता की कई बार शिकायतें हो चुक हैं। जांच के आदेश भी हुए, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ी। स्मार्ट सिटी एरिया में दो-तीन साल पहले डाली गई पानी की लाइन शुरू नहीं हो सकी। जब विकल्प तलाश कर पाइपलाइन की टेस्टिंग हुई तो गौराकुंड क्षेत्र में पानी सड़क फाड़कर बाहर आ गया। स्मार्ट सिटी के अफसरों का दावा है टेस्टिंग के दौरान डेड एंड से पानी बाहर आना स्वभाविक है। हालांकि, इस घटनाक्रम के एक वीडियो वायरल होने के बाद जिम्मेदारों की खासा आलोचना हो रही है।

सड़क फाड़कर पानी निकलने के वायरल सीसीटीवी फुटेज पर शहरवासियों ने स्मार्ट सिटी के कार्यों पर जमकर निशाना साधा। वहीं, एमपी कांग्रेस ने भी इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर कर सरकार पर कटाक्ष किया है। जनकार्य समिति के प्रभारी राजेंद्र राठौर ने जिम्मेदारों को कठघरे में खड़ा किया और मांग की कि स्मार्ट सिटी में 1 हजार करोड़ रुपए के किए गए कार्यों की जांच की जाए।

कांग्रेस ने कसा तंज

राठौर ने कहा- भले ही स्मार्ट सिटी के अफसर इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हों, लेकिन ये गंभीर लापरवाही है। अगर एजेंसी और अफसरों को जानकारी थी कि, पाइपलाइन से पानी निकलेगा तो ट्रैफिक डायवर्ट कर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? जिस वक्त सड़क पर गड्ढा हुआ, उसके कुछ देर बाद ही यहां से स्कूल बस गुजरी थी। इसे स्थानीय लोगों ने दूसरे हिस्से से पार कराकर बड़ा हादसा टाला। अन्य वाहन चालक भी घटनाक्रम के कारण बाल-बाल बचे।

परियोजना फेल साबित

स्मार्ट सिटी एरिया परियोजना फेल साबित हुई। अभी इस इलाके में नर्मदा पाइपलाइन से ही पानी सप्लाई होता है। स्मार्ट सिटी एरिया में 24 घंटे पानी सप्लाई के लिए 500 और 600 एमएम क्षमता वाली पाइपलाइन डाली थी। 2021-22 में सप्लाई शुरू होनी थी। तत्कालीन एजेंसी के काम अधूरा छोड़ने से साल 2022-23 में काम पूरा हुआ। हालांकि, सप्लाई अब तक शुरू नहीं हुई है। सोमवार को स्मार्ट सिटी ने इस लाइन की टेस्टिंग की, लेकिन इसी दौरान पाइपलाइन से प्रेशर के साथ अधिक मात्रा में पानी निकला, जिससे सड़क पर बड़ा गड्ढा हो गया। जिस जगह से पानी निकला, वहां कई दुकानों के बाहर फुटपाथ तक उखड़ गए हैं।

अधूरे काम कर रहे पूरे

जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा (बबलू) ने बताया कि, गौराकुंड क्षेत्र में बड़ी पाइपलाइन डालने का काम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किया जाना था। काम समय पर पूरा नहीं हुआ तो एजेंसी को नगर निगम ने ब्लैकलिस्ट कर दिया। अधूरे काम पूरे किए जा रहे हैं। जो पाइपलाइन साल 2023 में डाली गई थी, उसे सुभाष नगर पानी की टंकी से जोड़कर शुरू करने की योजना बनाई है। इसी के तहत सोमवार को इस लाइन की टेस्टिंग की गई। लाइन दो - तीन साल से बंद होने के कारण इसमें कीचड़ मिट्टी फंसी होने की आशंका थी।

पाइपलाइन के अंतिम छोर पर एंड कैप लगाकर सप्लाई शुरू की तो पानी अंत तक पहुंचा और प्रेशर के कारण एंड कैप खुल गई। इससे पानी बाहर आ गया। जहां गड्ढा हुआ, वहां करीब 150 मीटर के हिस्से में सीमेंट-कांक्रीट सड़क का निर्माण किया जाना है। इस हिस्से का निर्माण भी पाइपलाइन कमीशनिंग और अतिक्रमण न हटने के कारण रोका गया था। स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कार्यों की गुणवत्ता जांच के लिए पत्र लिखा था। स्मार्ट सिटी के अधूरे या बाकी काम पूरे किए जा रहे हैं।

जेल में हैं निर्माण एजेंसी के कर्ताधर्ता

स्मार्ट सिटी एरिया में काम करने के लिए पुंगलिया नामक एजेंसी को ठेका दिया था। एजेंसी के कार्यों की गुणवत्ता और लेटलतीफी की शिकायतें हुई थीं। इस एजेंसी की एक अन्य सबलेट एजेंसी तीर्थ गोपीकॉन ने भी इसका काम किया था, लेकिन फर्जी बैंक गारंटी मामले में सीबीआई ने एजेंसी के कर्ताधर्ताओं को गिरफ्तार किया। इसके संचालक फिलहाल जेल में हैं। पुंगलिया को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। बचे काम एचजेसीसी नामक एजेंसी कर रही है। स्मार्ट सिटी के प्रभारी कार्यपालन यंत्री सौरभ माहेश्वरी का कहना है कि, टेस्टिंग के दौरान पानी के प्रवाह से पानी का रिसाव, बहाव स्वाभाविक था। टेस्टिंग के दौरान अंतिम छोर से पानी लीक हुआ यानी पाइपलाइन की टेस्टिंग सफल रही।

जिन अफसरों को नोटिस दिया, वही जांच करने पहुंचे

मामले में स्मार्ट सिटी सीईओ ने दो अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने जांच के आदेश दिए हैं। जिन दो अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, वही दोनों अफसर मंगलवार को मौके पर जांच करने पहुंच गए। उन्होंने मौके से सैंपल भी लिए हैं। स्मार्ट सिटी सीईओ जैन ने बताया कि, जांच की जाएगी कि पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान लीकेज कैसे हुआ और सावधानी क्यों नहीं बरती गई। स्मार्ट सिटी के प्रभारी कार्यपालन यंत्री सौरभ माहेश्वरी और उपयंत्री अभिषेक बिल्लौरे को नोटिस दिया है। इन्हें तीन दिन जवाब देना होगा।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

-स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन का कहना है कि, सड़क के जिस हिस्से से पानी निकला है, वहां डामर का पेचवर्क किया गया था। पाइप लाइन डालने के लिए इस हिस्से में सड़क निर्माण होल्ड है, क्योंकि पाइपलाइन डालने के लिए खुदाई करनी पड़ती। पाइपलाइन टेस्टिंग के दौरान ये कोई हादसा नहीं, बल्कि डेड एंड से पानी निकला है। टंकी से भेजा गया पानी अंतिम छोर तक पहुंचा है।

-जनकार्य समिति के प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि, तत्कालीन निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने ठेकेदार को नोटिस जारी किया था, लेकिन ठेकेदार ने ही उल्टा निगम को नोटिस दे दिया। स्मार्ट सिटी के सभी कार्यों की जांच के लिए मैंने लिखा था। शहर में स्मार्ट सिटी के नाम पर आए 1 हजार करोड़ रुपए की जांच होनी चाहिए।

Updated on:
19 Aug 2026 11:30 am
Published on:
19 Aug 2026 11:30 am