
नई दिल्ली। हेडलाइन देखकर आपका सिर थोड़ा जरूर चकराया होगा। कहीं आपने ' milk ' से मतलब दूध से तो नहीं निकाल लिया। लेकिन यहां ' MILK ' मतलब देश की उन चार मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से है जिनका नाम माइक्रोमैक्स , इंटेक्स , लावा और कार्बन हैं। इन चार कंपनियों में से दो ने लावा और इंटेक्स मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस से अपने हाथ खींच लिए हैं। अब इंटेक्स ने अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर ताला लगा दिया है। जिसके जल्द बंद होने की बात सामने आ रही है। आपको बता दें कि चीनी मोबाइल कंपनियों के मार्केट बढऩे से इन चारों देसी कंपनियों को काफी बड़ा झटका लगा है। आंकड़ों पर बात करें तो इन चारों का भारत में मार्केट मार्च के अंत में 3 फीसदी रह गया। जबकि चीनी कंपनियों का मार्केट शेयर 65 फीसदी तक पहुंच गया।
इंटेक्स बेच रही है ग्रेटर नोएडा का प्लांट
प्राप्त जानकारी के अनुसार देसी मोबाइल कंपनी इंटेक्स कासना (ग्रेटर नोएडा) प्लांट को भी बेच रही है। ताज्जुब की बात तो ये है कि 20 एकड़ के इस प्लांट को बनाने के लिए 500 करोड़ रुपए कुछ महीने पहले ही खर्च किए थे। इस प्लांट में मोबाइल फोन, होम अप्लायंसेज और कस्टमर ड्यूरेबल्स बनाए जाने थे। जिसके लिए 1,500 करोड़ रुपए का निवेश किया जाना था। इंटेक्स के डायरेक्टर केशव बंसल कने प्लांट बेचने की तो पुष्टि कर दी, बिजनेस बंद करने की बात से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि इंटेक्स अभी भी हैंडसेट निर्माण करने के बिजनेस में मौजूद है। यह बात सही है कि पहले जितना काम हो रहा था उतना अब नहीं हो रहा है।
लावा और माइक्रोमैक्स का फोकस कहीं दूसरी ओर
वहीं दूसरी ओर लावा और माइक्रोमैक्स की बात करें तो उन्होंने भी फोन के अलावा दूसरे क्षेत्रों की ओर फोकस करना शुरू कर दिया है। लावा अब फीचर फोन के निर्माण के साथ डिस्ट्रीब्यूशन पर भी ध्यान दे रही है। जिसके लिए कंपनी ने चीन की मोबाइल कंपनी ऑनर से बात की है। वहीं दूसरी ओर माइक्रोमैक्स कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के क्षेत्र की ओर फोकस कर रहा है। कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर अपना ध्यान दे रही है।
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