Telecom Department का डेफर्ड स्पेक्ट्रम लायबिलिटीज 2.95 लाख करोड़ रुपए BSNL और MTNL के लिए 69,000 करोड़ रुपए के पैकेज को मंजूरी
नई दिल्ली।टेलीकाॅम सेक्टर ( telecom sector ) पर 7.88 लाख करोड़ रुपए का भारी भरकम कर्ज है और यह 31 अगस्त 2017 के आंकड़ों के अनुसार है। संसद में बुधवार को यह जानकारी दी गई। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ( telecom minister ravi shankar prasad ) ने संसद में एक जवाब में कहा कि 31 अगस्त 2017 की अंतर-मंत्रालयी समूह ( Inter Ministerial Group ) की रिपोर्ट के अनुसार दूरसंचार उद्योग ( Telecom Industry ) का कुल कर्ज 7.88 लाख करोड़ रुपए है।
इस मद में इतना कर्ज
इसमें से भारतीय कर्ज कुल 1.77 लाख करोड़ रुपए, विदेशी कर्ज 83,918 करोड़ रुपए और कुल बैंक/एफआई कर्ज 2.61 लाख करोड़ रुपए है। बैंक गारंटी 50,000 करोड़ रुपए है। दूरसंचार विभाग की डेफर्ड स्पेक्ट्रम लायबिलिटीज 2.95 लाख करोड़ रुपए है। अन्य तीसरे पक्ष की देनदारियां 1.80 लाख करोड़ रुपए हैं। इस तरह से कुल देनदारियां 7.88 लाख करोड़ रुपए की है। यह जवाब कौशलेन्द्र कुमार, रमेश चंदर कौशिक, राजीव रंजन सिंह, सौगत राय और एलएस तेजस्वी सूर्या के अतारांकित सवाल पर दिया गया। उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार एजीआर लेवी पर ब्याज और जुर्माना माफ करने की योजना बना रही है या नहीं।
बीएसएनएल को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रश्नकाल के दौरान निचले सदन में घोषणा में कहा है कि वह सरकारी स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनी, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को पुनर्जीवित कर इसे 'लाभदायक' बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके पास संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों का भी अतरिक्त प्रभार है। एक सांसद के प्रश्न के जवाब में प्रसाद ने कहा, "हम बीएसएनल को पुनर्जीवित कर इसे लाभदायक बनाएंगे।" मंत्री ने कहा कि सरकार बीएसएनएल और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) की कनेक्टिविटी के बारे में भी चिंतित है और उन्होंने कहा कि इसके पुनरुद्धार के लिए एक योजना तैयार की गई है। एमटीएनएल मुंबई और दिल्ली में दूरसंचार सेवाएं प्रदान करती है। इसका भी स्वामित्व सरकार के पास है।
सरकारी कंपनियों के लिए पैकेज की मंजूरी
सरकार ने पिछले महीने ही बीएसएनएल और एमटीएनएल के पुनरुद्धार के लिए 69,000 करोड़ रुपए के पैकेज को मंजूरी दी थी। इसमें घाटे में चल रहीं दो कंपनियों का विलय, उनकी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण और कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश शामिल है, ताकि संयुक्त कंपनी को दो सालों में लाभदायक किया जा सके।