जबलपुर

BJP का SC दांव: दावेदार पीछे छूटे, रत्नेश को महानगर की कमान

BJP सभी दावेदारों को पीछे छोड़ भाजपा ने रत्नेश सोनकर को जबलपुर महानगर का अध्यक्ष बनाकर सभी को चौंका दिया

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Jan 15, 2025
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BJP : सभी दावेदारों को पीछे छोड़ भाजपा ने रत्नेश सोनकर को जबलपुर महानगर का अध्यक्ष बनाकर सभी को चौंका दिया। यह निर्णय इसलिए भी अप्रत्याशित है कि स्थापना काल से लेकर अब तक भाजपा ने पहली बार अनुसूचित जाति (एससी) के किसी कार्यकर्ता को नगर की कमान सौंपी है। यह भी दिलचस्प संयोग है कि रत्नेश नगर कार्यकारिणी में महामंत्री के पद पर रहे हैं। उनसे पहले ग्रामीण के अध्यक्ष घोषित किए गए राजकुमार पटेल भी महामंत्री के पद से पदोन्नत होकर अध्यक्ष बने हैं।

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दरअसल, भाजपा नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव के घटनाक्रम से सबक लिया। जब सामान्य और ओबीसी को लेकर टिकट बंटवारे पर भारी विवाद हुआ था और कार्यालय में नारेबाजी व धक्कामुक्की हुई। यह सब ऐसे समय हुआ था जब पार्टी के वरिष्ठ नेता आब्जर्वर के तौर पर कार्यालय में मौजूद थे। यहां तक तत्कालीन केंद्रीय मंत्री को भी घेरा गया था।

BJP : इस्तीफे की पेशकश की थी

उस दौरान निवर्तमान महानगर अध्यक्ष प्रभात साहू ने इस्तीफे की पेशकश की थी। संगठन चुनाव में इसकी झलक देखने को मिली और सभी दावेदारों को दरकिनार कर पार्टी ने रत्नेश के नाम पर मुहर लगा दी। पार्टी ने पहले ही शिगूफा छोड़ दिया था कि एससी-एसटी और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन, यह फार्मूला जबलपुर में लागू कर दिया जाएगा, इसकी उम्मीद कम थी।

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BJP का सोनकर परिवार

रत्नेश सोनकर का परिवार भाजपा का परिवार है। उनके चाचा सीताराम सोनकर ने जनसंघ से लेकर भाजपा तक के लिए संघर्ष किया। वे पार्षद रहे और मप्र सड़क परिवहन निगम के चेयरमैन बनाए गए थे। रत्नेश भी पार्षद रह चुके हैं और प्रभात साहू के महापौर काल में एमआइसी के सदस्य मनोनीत किए गए थे। रत्नेश की भाभी माधुरी उसी वार्ड से पार्षद हैं। हालांकि, एक भाई महंगे चुनाव के खिलाफ पीआइएल दायर कर अभियान चला रहे हैं।

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BJP : एक तीर से दो निशाने

रत्नेश को महानगर के अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पार्टी ने पहले अपने कद्दावर नेता अंचल सोनकर को आगे बढ़ाया जो पूर्व विधानसभा से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं और शिवराज कैबिनेट में मंत्री भी रहें। लेकिन, उनकी पकड़ क्षेत्र से कमजोर होने लगी और कांग्रेस के पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। पिछला चुनाव भी घनघोरिया से हारे थे। जबलपुर जिले की आठ विधानसभा सीटों में एकमात्र पूर्व सीट ही है, जहां से कांग्रेस को जीत मिली थी। माना जा रहा है कि कांग्रेस का गढ़ बनते इस क्षेत्र से घनघोरिया को घेरने के लिए भी रत्नेश पर दांव लगाया गया है।

BJP : भाजपा में खिंचा सनाका

भाजपा ने ग्रामीण के साथ ही शहरी क्षेत्र में ऐसा निर्णय कर दिया है कि भाजपा नेताओं के न तो निगलते बन रहा और न ही उगल पा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्रामीण की घोषणा अब शहर में भी नाम तय होने के बाद पार्टी में सनाका बीत गया। शाम को रानीताल स्थित पार्टी कार्यालय में वाहनों की लम्बी भीड़ नजर आई पर किसी तरह का उत्साह नहीं दिखा। नगर अध्यक्ष की घोषणा के बाद केवल नियुक्ति पत्र को आगे सरका देने से आगे कोई बयान नहीं आया।

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