
जबलपुर. केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसके बावजूद जबलपुर में ई-वाहनों की संख्या तेजी से बढऩे के बाद भी चार्जिंग की सरकारी व्यवस्था पूरी तरह नदारद है। हालात यह हैं कि शहर और जिले में विभिन्न श्रेणियों के 21 हजार 283 इलेक्ट्रिक वाहन सडक़ों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन इन्हें चार्ज करने के लिए नगर निगम या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का एक भी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं है।
स्थिति यह है कि हजारों ई-वाहन चालकों को केवल करीब 20 निजी चार्जिंग सेंटरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इन केंद्रों पर संचालकों द्वारा तय किए गए शुल्क का भुगतान करना वाहन मालिकों की मजबूरी बन गया है। सरकारी विकल्प नहीं होने से प्रतिस्पर्धा का अभाव है और लोगों को सुविधाजनक व किफायती चार्जिंग व्यवस्था नहीं मिल पा रही है।
नगर निगम ने करीब दो माह पहले शहर में 40 स्थानों पर सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजा था। हालांकि अब तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है। प्रस्ताव लंबित होने के कारण परियोजना शुरू नहीं हो पाई है और शहर के ई-वाहन उपयोगकर्ताओं को अभी भी इंतजार करना पड़ रहा है। आईएसबीटी के सीईओ सचिन विश्वकर्मा के अनुसार चार्जिंग स्टेशन स्थापना से संबंधित फाइल स्वीकृति के लिए भेजी जा चुकी है। मंजूरी मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
नगर निगम की योजना के अनुसार शहर के 40 प्रमुख स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इनमें प्रमुख शासकीय कार्यालय, सार्वजनिक स्थल और नगर निगम के सभी 16 जोन कार्यालय शामिल हैं, ताकि शहर के अलग-अलग हिस्सों में ई-वाहन चालकों को आसानी से चार्जिंग सुविधा उपलब्ध हो सके।
प्रस्ताव के अनुसार चार्जिंग स्टेशन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किए जाएंगे। जिस निजी एजेंसी को काम सौंपा जाएगा, वह पे एंड यूज व्यवस्था के तहत स्टेशन संचालित करेगी। नगर निगम एजेंसी को जमीन उपलब्ध कराएगा, जबकि चार्जिंग स्टेशन निर्माण, ट्रांसफॉर्मर स्थापना और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के लिए शासन स्तर पर सब्सिडी का प्रावधान रहेगा।
रिटायर्ड आरटीओ एमडी मिश्रा का कहना है कि जिस गति से शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उसी अनुपात में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार नहीं हुआ तो आने वाले समय में वाहन चालकों की मुश्किलें और बढ़ेगी। चार्जिंग के लिए लंबी दूरी तय करना, निजी केंद्रों पर निर्भरता और मनमाना शुल्क ई-वाहनों को बढ़ावा देने की नीति पर भी सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में 40 प्रस्तावित चार्जिंग स्टेशनों को शीघ्र मंजूरी मिलना शहर की जरूरत बन गई है।
मोटर कैब -18
इ-रिक्शा -9893
थ्री व्हीलर पैसेंजर-2136
इ-रिक्शा विथ कार्ट- 634
थ्री व्हीलर गुड्स- 124
बाइक/स्कूटर- 7895
मोटर कार- 505
मोपेट -58
एग्रीकल्चर ट्रैक्टर -01
बढ़ते प्रदूषण और महंगे ईंधन के बीच ई-वाहन (इलेक्ट्रिक वाहन) परिवहन का बेहतर विकल्प बनकर उभर रहे हैं। इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये पेट्रोल और डीजल की तुलना में बहुत कम खर्च में चलते हैं, जिससे वाहन मालिकों की ईंधन लागत में उल्लेखनीय बचत होती है। ई-वाहनों से धुआं नहीं निकलता, इसलिए वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है। इनके संचालन में शोर भी कम होता है, जिससे ध्वनि प्रदूषण घटता है। इलेक्ट्रिक वाहनों में इंजन की तुलना में कम चलने वाले पुर्जे होते हैं, इसलिए रखरखाव और सर्विसिंग का खर्च भी कम आता है। सरकार भी ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं, सब्सिडी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रही है। यदि चार्जिंग सुविधाओं का और विस्तार किया जाए तो ई-वाहन भविष्य में किफायती, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था का मजबूत आधार बन सकते हैं।
नगर निगम द्वारा शीघ्र ही शहर में इवी वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाने की दिशा में काम कराया जाएगा। अभी 10 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन बनाने की तैयारी चल रही है। इससे इवी वाहन वालों को बड़ी सुविधा मिलेगी।