जबलपुर

एक क्लिक में खुलेगा 1975 तक की जमीनों का रिकॉर्ड, 6.88 लाख रजिस्टयां हो रहीं ऑनलाइन

पंजीयन विभाग की डिजिटल पहल से खत्म होंगे दफ्तरों के चक्कर, 6.26 लाख दस्तावेज हो चुके हैं ऑनलाइन स्कैन, संपदा-2.0 से जुड़ेगा पूरा डाटा, सितंबर माह तक रिकॉर्ड डिजिटल करने का लक्ष्य, 2015 के बाद से विभाग में हो रही ऑनलाइन प्रक्रिया
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Jul 23, 2026
Land records dating back to 1975 are online
Land records dating back to 1975 are online

जबलपुर. जिले में जमीनों से जुड़े पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और आम नागरिकों को आसानी से उपलब्ध कराने के लिए जिला पंजीयन विभाग बड़े स्तर पर रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण करा रहा है। इस पहल के तहत वर्ष 1975 से 2015 तक के पुराने रजिस्ट्री रिकॉर्ड को स्कैन कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 6 लाख 26 हजार दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है, जबकि कुल 6 लाख 88 हजार दस्तावेजों को डिजिटल करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग का दावा है कि सितंबर तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद सभी रिकॉर्ड संपदा-2.0 पोर्टल पर अपडेट कर दिए जाएंगे।
वर्तमान में जमीनों की रजिस्ट्री और पंजीयन की प्रक्रिया वर्ष 2015 से पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी है, लेकिन उससे पहले के पुराने दस्तावेज अभी भी कागजी स्वरूप में सुरक्षित रखे गए थे। इन्हीं रिकॉर्ड को अब डिजिटल स्वरूप दिया जा रहा है, ताकि नागरिकों और विभाग दोनों को सुविधा मिल सके। जिला पंजीयन विभाग ने यह कार्य नाइन स्टार इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भोपाल को सौंपा है। कंपनी के 12 कर्मचारी पिछले 22 जून 2023 से लगातार दस्तावेजों की स्कैनिंग में लगे हुए हैं। वर्तमान में 1980 तक के रिकॉर्ड स्कैन किए जा चुके हैं और शेष रिकॉर्ड पर तेजी से काम चल रहा है।

इसलिए रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने बनी व्यवस्था

पुराने जमीन संबंधी दस्तावेज वर्षों से रजिस्टरों और फाइलों में सुरक्षित रखे जाते रहे हैं। समय के साथ इनमें नमी, बारिश, दीमक, आग या अन्य कारणों से खराब होने का खतरा बना रहता है। कई स्थानों पर पुराने रिकॉर्ड क्षतिग्रस्त भी हो चुके हैं। ऐसे में रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण न केवल उन्हें स्थायी रूप से सुरक्षित करेगा, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद, सत्यापन या प्रमाणन के लिए तत्काल उपलब्ध भी रहेगा। डिजिटल रिकॉर्ड होने से नागरिकों को रजिस्ट्री की प्रति या अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेगे। इससे विभाग का कार्यभार भी कम होगा और रिकॉर्ड खोजने में लगने वाला समय भी बचेगा।

सितंबर तक पूरा होगा डिजिटलीकरण

विभाग के अनुसार सितंबर तक सभी 6.88 लाख दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी कर उन्हें संपदा-2.0 प्रणाली से जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद पात्र नागरिक ऑनलाइन माध्यम से आवश्यक रिकॉर्ड प्राप्त कर सकेंगे और भविष्य में जमीन संबंधी सेवाएं अधिक पारदर्शी एवं आसान हो जाएंगी।

डिजिटल रिकॉर्ड के प्रमुख फायदे

  • नागरिकों को रजिस्ट्री की जानकारी के लिए बार-बार कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा।
  • रिकॉर्ड कहीं से भी ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
  • पुराने दस्तावेज बारिश, नमी, दीमक और फटने जैसी समस्याओं से सुरक्षित रहेंगे।
  • रिकॉर्ड गुम होने या खराब होने की आशंका काफी कम होगी।
  • रिकॉर्ड खोजने में लगने वाला समय घटेगा और सेवाएं तेजी से मिलेंगी।
  • कागज, फाइल, स्टोरेज और रखरखाव पर होने वाला खर्च कम होगा।
  • विभाग के कर्मचारियों का श्रम और समय बचेगा।
  • जमीन संबंधी विवादों में रिकॉर्ड का सत्यापन अधिक तेज और पारदर्शी होगा।
  • प्रशासन को भूमि संबंधी जानकारी जुटाने और जांच में आसानी होगी।
  • डिजिटल रिकॉर्ड से ई-गवर्नेंस को मजबूती मिलेगी।

वर्जन

जिले के पुराने भूमि पंजीयन अभिलेखों का डिजिटलीकरण तेजी से कराया जा रहा है। 2023 से काम चल रहा था। अब कुछ ही काम शेष बचा है। अब तक 6.26 लाख दस्तावेज स्कैन किए जा चुके हैं और सितंबर तक 6.88 लाख रिकॉर्ड का कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। सभी रिकॉर्ड संपदा-2.0 पोर्टल से जोड़े जाएंगे, जिससे नागरिकों को ऑनलाइन दस्तावेज उपलब्ध होंगे और अभिलेख लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे।

डॉ. पवन अहिरवाल, डीआर।

Updated on:
23 Jul 2026 09:47 am
Published on:
23 Jul 2026 09:46 am