जबलपुर

देश की सबसे लंबी जल सुरंग एमपी में, विंध्य के माथे पर होगा नर्मदा का ‘तिलक’

Longest Water Tunnel : कटनी के स्लीमनाबाद क्षेत्र में सुरंग का काम सिर्फ दो मीटर बाकी। जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिले के 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
2 min read
Longest Water Tunnel
Longest Water Tunnel (विंध्य के माथे पर होगा नर्मदा का 'तिलक' Photo Source- Patrika)

MP News :मध्य प्रदेश के सिंचाई के इतिहास में बहुत जल्द मील का पत्थर जुड़ने जा रहा है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में निर्मित देश और प्रदेश की सबसे लंबी जल सुरंग (11.952 किलोमीटर) का निर्माण कार्य अंतिम ब्रेकथ्रू पर पहुंच गया है। यानी महज दो मीटर काम बाकी है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की बरगी व्यपवर्तन परियोजना के इस सबसे अहम हिस्से के पूरा होने के बाद बरगी बांध का पानी बिना किसी पंप के विंध्य अंचल तक पहुंचेगा।

इस परियोजना के जरिए एमपी के जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिले के 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। अक्टूबर से पानी पहुंचाने की तैयारी है। खास बात ये है कि, इन सभी गांवों में बरगी बांध का पानी बिना पंप के टनल के जरिए पहुंचेगा। इसके अलावा 12 किलोमीटर लंबी नहर भी बनाई गई है।

इंजीनियरिंग के आगे पहाड़ झुका, बाधाएं टूटीं

परियोजना को 2008 में मंजूरी मिली थी। 2011 में सुरंग निर्माण शुरू हुआ। लागत 799 करोड़ रुपए आंकी गई थी। भूगर्भीय परिस्थितियों, ऊंचे भूजल स्तर, सिंकहोल (अचानक जमीन धंसने), कोरोना काल और निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत के कारण परियोजना पर लगभग 1442 करोड़ रुपए खर्च हुए। स्लीमनाबाद क्षेत्र में लगभग 30 मीटर गहराई पर खुदाई की गई। जर्मनी की टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उपयोग किया गया। 56 कटर चट्टानों को काटते हुए कई बार बदलने पड़े। सुरंग पर 20 मीटर चौड़ी जमीन सुरक्षा के लिहाज से अस्थायी रूप से अधिग्रहित की गई।

कई बार बढ़ाई गई समय सीमा

इस परियोजना का काम साल 2011 में शुरू हुआ था। सलैया फाटक से खिरहनी गांव तक पहाड़ों को चीरते हुए बनाई गई इस सुरंग के डाउन स्ट्रीम का कार्य पहले ही पूरा हो चुका था। अप स्ट्रीम का काम साल 2025 के अंत तक पूरा होना था, लेकिन समय सीमा कई बार बढ़ाई गई।

टनल से जुड़ी खास बातें

-टनल की लंबाई: 11.952 किलोमीटर
-निर्माण अवधि: 2011 से 2026
-लागत: 799 करोड़ से बढ़कर लगभग 1442 करोड़
-सिंचाई क्षमता: 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि
-लाभान्वित जिले: जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा
-लाभान्वित गांव: लगभग 1450 संभावित
-जलापूर्ति: अक्टूबर 2026

Updated on:
15 Jul 2026 07:00 am
Published on:
15 Jul 2026 07:00 am