13 जुलाई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हर महीने चोरी हो रही 26% बिजली, एमपी में ईमानदार बिजली उपभोक्ता चुका रहे बड़ी कीमत

Electricity consumers: बिजली की नई टैरिफ दरें लागू होने के बीच लाइन लॉस कम कर 2028 तक बिजली व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही है।
2 min read
Google source verification
Electrical loads:बिजली लोड की होगी जांच (Photo Source - Patrika)

Electricity consumers: नई टैरिफ दरें भी लागू (Photo Source - Patrika)

Power line losses:मध्यप्रदेश में बिजली की बढ़ती दरों के बीच अब बिजली चोरी और लाइन लॉस का बड़ा संकट भी सामने है। पूर्व, मध्य व पश्चिम क्षेत्र के 22 जिलों में हर महीने औसतन 25 प्रतिशत बिजली लाइन लॉस की भेंट चढ़ रही है। यानी उत्पादित और खरीदी गई बिजली का एक बड़ा हिस्सा या तो चोरी हो रहा है या वितरण व्यवस्था की खामियों में नष्ट हो रहा है।

इसका सीधा असर बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है, जबकि इसकी भरपाई का बोझ अंततः ईमानदारी से बिल भरने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ता है। बिजली कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए पूर्व क्षेत्र में लाइन लॉस को 26.66 प्रतिशत से घटाकर 14% तक लाने का लक्ष्य तय किया है।

नई टैरिफ दरें भी लागू

आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य क्षेत्र की स्थिति सबसे खराब है, जहां लाइन लॉस 29.60 प्रतिशत है, जबकि पश्चिम क्षेत्र में यह सबसे कम 12 प्रतिशत दर्ज किया गया है। लक्ष्य है कि पूर्व और मध्य क्षेत्र दोनों को 14 प्रतिशत तथा पश्चिम क्षेत्र को 12 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखा जाए। 2028 तक लाइन लॉस कम करने व टेरिफ कम करने कवायद जारी है। इधर, एक अप्रैल से बिजली की नई टैरिफ दरें भी लागू हो चुकी हैं। अब 0 से 50 यूनिट तक 4.71 रुपए, 51 से 150 यूनिट तक 5.67 रुपए, 151 से 300 यूनिट तक 7.05 रुपए और 300 यूनिट से अधिक खपत पर 7.24 रुपए प्रति यूनिट की दर से शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा अलग-अलग श्रेणियों में फिक्स चार्ज भी वसूला जा रहा है।

लाइन लॉस को कम करने के प्रयास जारी हैं। वी-मित्र ऐप की भी मदद ली जा रही है। विकेंद्रीकरण योजना के माध्यम से भी इसे 2027 में कम करने का लक्ष्य तय किया गया है।- पीके अग्रवाल, एडिशनल सीजीएम कार्पोरेट पूर्व

केंद्रीकरण योजना से घटेगा लाइन लॉस

बिजली कंपनी ने लाइन लॉस कम करने के लिए विकेंद्रीकरण योजना लागू की है। इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में 21 सर्कल में से चयनित दो-दो सर्कल पर विशेष फोकस किया जाएगा। इनके कुल 42-42 वितरण केंद्रों में, जहां 2500 से कम उपभोक्ता हैं, वहां अलग रणनीति के तहत निगरानी बढ़ाई जाएगी। बिजली चोरी रोकने, मीटर रीडिंग की सटीकता बढ़ाने और बिलिंग व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में औसत बिलिंग लगभग 75 प्रतिशत है।

विभाग के सामने ये भी बड़ी चुनौती

-वर्षों से राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना, फीडर सेपरेशन, सौभाग्य योजना और आरडीएसएस जैसी योजनाओं पर करोड़ों खर्च के बावजूद लाइन लॉस में अपेक्षित कमी क्यों नहीं आ सकी।

-बिजली कंपनी का तर्क है कि वितरण नेटवर्क का विस्तार तो हुआ, लेकिन उसी अनुपात में मैदानी अमले और तकनीकी स्टाफ की भर्ती नहीं हुई।

-निगरानी, मेंटेनेंस और बिजली चोरी रोकने की कार्रवाई प्रभावित हो रही है, वी मित्र की मदद लेकर भी बिजली चोरी रोकने कवायद जारी।

-बिजली विशेषज्ञों का मानना है कि योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, सख्त कार्रवाई, पर्याप्त तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति, नियमित निरीक्षण और आधुनिक निगरानी तंत्र जरूरी।