
Animal Love (बैतूल में सामने आया इंसान और जानवर के बीच निस्वार्थ प्रेम अनोखा मामला Photo Source- Patrika)
Betul News : मध्य प्रदेश के बैतूल में अपने मालिक की मौत के सदमे में एक पालतू डॉगी 'डुग्गू' की भी मौत हो गई। शहर के सिविल लाइन इलाके में हुई इस हैरान कर देने वाली घटना ने परिजन के साथ - साथ स्थानीय लोगों को भावुक कर दिया है। बता दें कि, कुछ दिनों से बीमार चल रहे प्रदीप जैन का उपचार के दौरान निधन हो गया। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि, अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान 'डुग्गू' अपने मालिक के पार्थिव शरीर के पास से हटने को तैयार नहीं था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि, जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो 'डुग्गू' भी कुछ दूर अर्थी के साथ चला। इसके बाद अचानक निढाल होकर गिर गया।
पहले तो लोगों को लगा कि, वो बेहोश हो गया है। लेकिन, जांच करने पर पता चला कि, उसकी भी मौत हो चुकी है। परिजन के अनुसार, इसके बाद 'डुग्गू' की भी अर्थी सजाई गई और दोनों की एक साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। बाद में दोनों को एक साथ अंतिम विदाई दी गई।
67 वर्षीय प्रदीप जैन का राजधानी भोपाल के एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान कल निधन हो गया था। वे बीते आठ दिनों से बीमार थे। उनका पार्थिव शरीर कल शाम को बैतूल लाया गया, जहां परिजन और शुभचिंतकों ने उन्हें अंतिम विदाई देने की तैयारी की। लेकिन इस विदाई में प्रदीप का एक ऐसा साथी भी था, जो पिछले 15 साल से उनके हर सुख-दुख में साथ निभाता आ रहा था।
परिवार ने अर्थी सजा दी। लोग अंतिम यात्रा की तैयारी में जुटे हुए थे। कुछ को सगे संबंधियों के आने का इंतजार था। लेकिन, प्रदीप का पालतू डॉगी (डुग्गू) अपने मालिक के पार्थिव शरीर के पास उनके चेहरे की ओर टकटकी लगाए बैठा रहा। मानों इंतजार में हो कि, मालिक अभी उठेंगे और उन्हें आवाज देंगे। इसी बीच घर के किसी सदस्य ने उसे अन्य कमरे में ले जाकर बंद भी कर दिया, जहां से उसने इतनी तेज-तेज आवाजें निकालनी शुरु की कि, परेशान आकर घर वालों ने कमरा खोल दिया। दरवाजा खुलते दौड़कर डुग्गू दोबारा प्रदीप के पार्थिव शरीर के पास आकर बैठ गया। इसपर घर वालों ने उसे वहीं बैठे रहने की सहमति दे दी। क्योंकि, वहां बैठकर वो कम से कम शांत तो था।
अब वो समय आ गया था, जब प्रदीप जैन को अंतिम संस्कार के लिए ले जाना था। सभी परिजन भी पहुंच चुके थे और अंतिम यात्रा का समय भी आ गया था। रिश्तेदारों ने जैसे ही पार्थिव शरीर को कांधों पर उठाया और विश्राम घाट के लिए रवाना हुए तो डुग्गू भी अर्थी के साथ-साथ चल पड़ा। लेकिन, कुछ कदम चलने के बाद ही अचानक वो निढाल होकर जमीन पर गिर गया। इस बीच कुछ लोग तो आगे बढ़ गए, लेकिन परिवार के कुछ सदस्य डुग्गू के अचानक गिरने पर हैरानी के साथ उसकी जांच पड़ताल में जुट गए। काफी देर तो उन्हें समझ ही नहीं आया कि, आखिर ये माजरा क्या है, क्योंकि जो डॉगी चंद सेकंड पहले अर्थी के साथ चल रहा था। वो उनके सामने मृत अवस्था में पड़ा था।
कुछ ही मिनटों में परिवार को ये समझ आ गया कि, ये डॉगी का अपने मालिक के प्रति अटूट प्रेम है, जिसने उनसे बिछड़ना बर्दाश्त नहीं किया। आखिरकार घर वालों ने प्रदीप जैन की भी अर्थी रुकवाई और फिर डुग्गू की अर्थी सजाई गई। कुछ देर के विलंब के बाद दोनों अर्थियों की एक साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। ये दृश्य इतना भावुक था, जिसे देखकर अंतिम यात्रा में शामिल हर कोई अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था। अंत में प्रदीप जैन का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया, जबकि उनके वफादार साथी डुग्गू को श्मशान परिसर के पास सम्मानपूर्वक दफनाया गया।
परिजन का कहना है कि, डुग्गू उनके घर का सिर्फ पालतू जानवर नहीं था, बल्कि परिवार का सदस्य था। उसने अपने मालिक का साथ जीवन भर निभाया और अंतिम यात्रा में भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। ये घटना एक बार फिर साबित करती है कि, निस्वार्थ प्रेम, वफादारी और अपनापन शब्दों से नहीं, बल्कि रिश्तों से पहचाना जाता है। 15 साल तक साथ निभाने वाले डुग्गू ने अपने मालिक को ऐसी विदाई दी, जिसे देखने वाले शायद कभी भूल नहीं सकेंगे।
Updated on:
14 Jul 2026 01:47 pm
Published on:
14 Jul 2026 01:47 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
