
NHAI- बदहाल रोड के बावजूद टोल वसूली पर जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इस पर एनएचएआइ ने टोल खासा घटा दिया। जबलपुर हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर शाहपुरा आरओबी के ध्वस्त हिस्से से जुड़े मामले में अहम अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने शाहपुरा आरओबी मरम्मत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि कोर्ट ने पौड़ी रेलवे गेट खोलने की मांग सुरक्षा व तकनीकी बाधाओं के कारण ठुकरा दी। इस बीच मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट, 2024' के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में फास्ट ट्रैक कोर्ट तय किए हैं। सीएम मोहन यादव ने इसका ऐलान किया था।
एसीजे विवेक रूसिया व न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की बेंच ने स्पष्ट किया कि कोर्ट के संज्ञान के बाद एनएचएआइ ने शाहपुरा टोल प्लाजा पर यूजर फीस में करीब 70 प्रतिशत की कटौती की है। कोर्ट ने फिलहाल टोल वसूली पूरी तरह बंद करने से इनकार किया लेकिन मरम्मत कार्य में तेजी लाने विशेषज्ञ की राय लेने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि मार्ग का केवल 4.8 किमी हिस्सा ही डायवर्ट है, इसलिए पूर्ण टोल माफी का आधार नहीं बनता। एनएचएआइ द्वारा 24 जून से टोल दरों में 70 प्रतिशत कमी किए जाने को रेकॉर्ड पर लिया। याचिकाकर्ता की पौड़ी रेलवे गेट खोलने की मांग भी कोर्ट ने सुरक्षा व तकनीकी बाधाओं के कारण ठुकरा दी।
खराब सड़क और शाहपुरा के पास ओवरब्रिज के ढहने के बावजूद टोल वसूली जारी रहने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार के साथ ही एनएचएआई (NHAI) से भी जवाब तलब किया। जबलपुर हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग-45 (NH-45) की बदहाली पर सख्ती दिखाई।
बता दें कि जबलपुर-भोपाल एनएच-45 पर पुल धंसने और खराब सड़कों के बाद भी टोल टैक्स वसूला जा रहा था। इसके खिलाफ वाहन चालकों में गहरी नाराजगी थी।
जनहित याचिका में कहा गया कि जबलपुर–भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से बना पुल ढह गया। मात्र तीन वर्षों में ही करोड़ों का पुल क्षतिग्रस्त हो गया। उसका एक हिस्सा टूट गया। कई महीने बीतने पर भी मरम्मत पूरी नहीं की गई है।
एनएचएआइ ने टोल घटाया
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद 70 प्रतिशत तक कमी की
राष्ट्रीय राजमार्ग-45 (NH-45) पर घटाया टोल
शाहपुरा आरओबी मरम्मत कार्य में तेजी के निर्देश
जबलपुर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती