
Premanandji Disciple Rasik Dulari Sharan : जबलपुर के साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की वृंदावन में संदिग्ध मौत का मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। वे प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य थे। दीपक लोधी की शुक्रवार को राधा केली कुंज आश्रम में 4 मंजिला इमारत से गिरने से मौत हो गई थी। इस खौफनाक वारदात ने जहां संत समाज से लेकर पुलिस महकमे तक में हड़कंप मचा दिया वहीं रसिक दुलारी शरण के परिजनों को जीवन भर का दुख दे दिया है। मां मायाबाई तो उनकी याद में बार बार रो उठती हैं। वे बताती हैं कि बेटे दीपक ने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद इतने कड़े नियम अपना लिए थे कि मुझसे भी दूरी बना ली थी। अब वह सदा के लिए बिछुड़ गया।
मथुरा पुलिस के अनुसार रसिक दुलारी शरण की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आ चुकी है। इसमें उनकी मौत की वजह अत्यधिक रक्तस्राव बताई गई है। जानकरी के अनुसार रसिक दुलारी शरण चौथी मंजिल से गिरे थे जिससे शरीर पर कई गंभीर चोटें आईं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं। परिजनों ने पूरे मामले को संदिग्ध बताया है। मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की है। फिलहाल मथुरा पुलिस हर एंगल से जांच करने की बात कह रही है।
परिजन का कहना है कि आश्रम में हमें घंटों बैठाए रखा। पूरा दिन इधर उधर घुमाते रहे। रिश्तेदार सोनू पटेल ने बताया कि दीपक लोधी की मौत की जानकारी हमें अस्पताल में मौजूद आश्रम के गार्ड ने दी थी। प्रबंधन यह बात छुपाते रहा। दीपक लोधी के भाई, दादा, दादी आदि ने भी आश्रम प्रबंधन पर अनेक गंभीर आरोप लगाए हैं।
बेटे को खोने के बाद रसिक दुलारी शरण की मां मायाबाई का रो रोकर बुरा हाल हो चुका है। उन्होंने बताया कि प्रेमानंदजी से गुरु दीक्षा लेने के बाद दीपक कभी परिवार से मिलने तक नहीं आया था। उसने कड़े नियमों नियमों का पालन किया। हमसे कभी बात तक नहीं की।
मां मायाबाई के मुताबिक दीक्षा के बाद बेटा दीपक पूरी तरह गुरु और प्रभु सेवा में समर्पित हो गया था। केवल एक बार मुझसे मिला। तब उसने पूरा वृंदावन घुमा दिया था। रसिक दुलारी शरण ने मोह माया के त्याग की गुरु आज्ञा का पूरा पालन किया।
दीपक लोधी के दीक्षा के पूर्व के जीवन को भी मां मायाबाई याद करती हैं। वे बताती हैं कि मेरा बेटा बहुत शांत स्वभाव का था। उसे सभी से बहुत प्रेम था। दीपक के यूं चले जाने से आत्मा बहुत दुखी हो रही है।