
Jablpur news: अगर आप चांदी लगी मिठाई खाते हैं तो सावधान हो जाइए। जानकारी के लिए बता दें कि मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में 300 से 400 रुपए किलो बिकने वाले पेड़ा और बर्फी में 2.50 लाख रुपए किलो कीमत वाले चांदी के वर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटी मिठाई दुकानों पर चांदी के वर्क लगी मिठाइयां बिक रही हैं। इतनी कम कीमत में चांदी का वर्क इस्तेमाल करने पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सस्ते वर्क में एल्युमिनियम या अन्य धातुओं की मिलावट की आशंका है। त्योहारों में मांग का फायदा उठाकर कम कीमत वाला वर्क इस्तेमाल करने की आशंका है।
विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी या अशुद्ध वर्क के सेवन से पेट संबंधी समस्या हो सकती है। लंबे समय तक अशुद्ध भारी धातुओं के सेवन से किडनी और अन्य अंगों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है। बच्चों और बड़ों के लिए मिलावटी वर्क नुकसानदायक हो सकता है। इसके सेवन से पेट दर्द, उल्टी, मतली और पाचन संबंधी परेशानी भी हो सकती है। लगातार सेवन करने पर शरीर में विषैले तत्व जमा होने का खतरा रहता है। इसलिए मिठाइयों पर लगाए जाने वाले वर्क की गुणवत्ता और उसकी शुद्धता की जांच जरूरी है।
-10 हजार किलो के लगभग खोवा का रोज मिठाई बनाने में होता है उपयोग।
-04 हजार किलो खोवा से बनती है बर्फी और पेड़ा।
-50 प्रतिशत बर्फी और पेड़ा में चांदी के वर्क का उपयोग।
असली चांदी का वर्क बेहद पतला और नाजुक होता है। हाथ से छूने पर टूटकर बिखरने या चिपकने की बात कही गई है। हथेलियों के बीच रगड़ने पर शुद्ध वर्क पूरी तरह गायब होने और कोई धातु का निशान नहीं छोड़ने की बात बताई है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड से जांच और वर्क को जलाकर उसकी शुद्धता परखने के तरीके बताए गए हैं। ऐसी जांच विशेषज्ञों की देखरेख में होनी चाहिए।
शुद्ध चांदी को पीट-पीटकर कागज से भी पतली शीट में बदला जाता है। इसकी मोटाई करीब 0.2 से 0.8 माइक्रोमीटर तक बताई है। पहले इसके निर्माण में पशुओं की झिल्ली का उपयोग होता था, लेकिन अब आधुनिक तकनीक से निर्माण किया जाता है। चांदी का वर्क मिठाई की सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
खाद्य सामग्री, विशेषकर मिठाइयों के सैंपल जुटाकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। चांदी के वर्क के उपयोग की भी जांच की जाएगी। मिलावट सामने आने पर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।- अमित गुप्ता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी