
Success Story: खेती में कुछ नया करने की चाह हो तो जमीन वही रहते हुए भी किसान अपनी आमदनी और खेती का तरीका दोनों बदल सकता है। इस बात को सच साबित किया है बघराजी के प्रगतिशील किसान सुरेश कुशवाहा ने। पारंपरिक अनाज की खेती से हटकर उन्होंने हरी सब्जियों की खेती का दांव खेला और 12 एकड़ खेत को सब्जियों से लहलहा दिया। पहली बार बड़े स्तर पर सब्जियों की खेती शुरू करने में थोड़ा डर जरूर था, लेकिन उनकी सूझबूझ और खेती के पुराने अनुभव ने रंग दिखाया। नतीजा यह रहा कि पहले ही प्रयास में उनके खेत में टमाटर, शिमला मिर्च और बैंगन की बंपर फसल तैयार हो गई है।
सुरेश ने 12 एकड़ से ज्यादा में सब्जी के खेत तैयार करने से लेकर बीजों के चयन, तकनीकों के प्रयोग और मजदूरी आदि पर करीब 15 लाख रुपए खर्च किए थे। पहले ही प्रयास में बेहतरीन उत्पादन मिलने से उन्हें प्रति एकड़ करीब 2 लाख रुपए तक की आमदनी प्राप्त हो रही है। वर्तमान में इस आधुनिक खेती से हर चार दिन में 600 किलो टमाटर का उत्पादन निकल रहा है। इसके साथ ही 25 क्विंटल भटा और शिमला मिर्च का उत्पादन मिल रहा है।
फसल तैयार करने से लेकर तुड़ाई और बाजार तक पहुंचाने तक वे लगातार प्रबंधन पर ध्यान दे रहे हैं। समय पर सिंचाई, खाद, कीट नियंत्रण और फसल की बारीकी से निगरानी कर उत्पादन को बेहतर बनाए रखा जा रहा है। पहले ही प्रयास में मिली शानदार सफलता के बाद अब उन्होंने आगे भी सब्जी उत्पादन जारी रखने का निर्णय लिया है। उनकी फसल आसपास के किसानों को संदेश दे रही है कि खेती में बदलाव, बेहतर प्रबंधन, बाजार की मांग के अनुसार फसल चयन कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।
06 शिमला मिर्च लगाई गई है।
04 एकड़ में भटा (बैंगन) की फसल है।
02 एकड़ में टमाटर की खेती की गई है।
यदि फसल का सही प्रबंधन किया जाए, तो पारंपरिक फसलों की तुलना में सब्जियों की भी बेहतरीन पैदावार ली जा सकती है। यदि किसान अपनी जमीन, पानी, बाजार की मांग और फसल के समय का सही आकलन कर खेती करें, तो पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प भी आसानी से अपनाए जा सकते हैं।- सुरेश कुशवाहा, किसान