Bastar Voter List: बस्तर जिले में चार महीने चले एसआईआर अभियान के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी। कलेक्टर आकाश छिकारा ने राजनीतिक दलों को सौंपी लिस्ट, जिसमें जगदलपुर, बस्तर और चित्रकोट विधानसभा से 51,301 नाम कटे।
Bastar Voter List: समूचे छत्तीसगढ़ के साथ ही बस्तर जिले के तीन विधानसभा के लिए 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई एसआईआर की प्रक्रिया 21 फरवरी को पूरी कर ली गई। तय कार्यक्रम के अनुसार कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने फाइनल लिस्ट जारी की। कलेक्टर आकाश छिकारा ने फाइनल लिस्ट कलेक्ट्रेट में राजनीतिक दलों को सौंपी। एसआईआर के बाद बस्तर जिले में आने वाले जगदलपुर, बस्तर और चित्रकोट विधानसभा में 51 हजार 301 कट गए हैं।
यह सभी वो वोटर हैं जिनकी मृत्यु हो गई थी, जिले से शिफ्ट हो गए थे या उनके बस्तर के अलावा अन्य जिले या राज्य में नाम थे। इसके अलावा ऐसे लोगों के नाम भी कटे हैं जो अपनी भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर पाए, ऐसे लोग 2003 की सूची में अपना नाम नहीं दिखा पाए। बस्तर में ऐसे लोगों की संख्या भी पाई गई है जो बांग्लादेश, नेपाल जैसे देशों से यहां आकर रह रहे थे।
ऐसे लोगों के पास 2003 का ब्योरा नहीं था और अब वे एसआईआर की प्रक्रिया के बाद मतदाता की पात्रता नहीं रखते हैं। इस पूरे अभियान के बीच जिले में 4267 नए वोटरों के नाम भी जोड़े गए। इसके साथ ही इनका नेतृत्व तीन ईआरओ और 52 एईआरओ ने एक साथ किया।
जिले में चार महीने तक चले एसआईआर के महाअभियान में बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ की अहम भूमिका रही। जिले में 827 बीएलओ बनाए गए थे। अब प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी बीएलओ का दर्द भी सामने आ रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने दिन-रात अभियान को सफल बनाने मेहनत की। घर-परिवार को दांव पर लगाकर काम करते रहे।
इस बीच स्कूलों में जरूरत पड़ी तो वहां पढ़ाई भी पूरी करवाई लेकिन अब तक किसी भी बीएलओ को प्रशस्ति पत्र तक नहीं मिला है। अभियान के बीच लक्ष्य पूरा करने वाले गिनती के बीएलओ को सम्मानित किया गया लेकिन सैकड़ों बीएलओ अब भी ऐसे हैं जो सम्मान के हकदार हैं।
27 अक्टूबर को जब प्रक्रिया शुरू हुई तब जिले में 571694 वोटर थे। मृत्यु, डबल एड्रेस और स्थान परिवर्तन की प्रक्रिया के बाद 516126 वोटर बचे। इसके बाद 4267 नाम जुड़े भी और अंत में जब फाइनल सूची आई तो उसमें 520393 नाम थे। इस तरह चार महीने की प्रक्रिया के बाद 51301 नाम कम हो गए। यह वही नाम हैं जिनका बस्तर जिले की सूची में कोई औचित्य नहीं रह गया था।
अकेले बस्तर जिले की तीन सीटों पर 5130 नाम कट गए हैं। यह आंकड़ा बड़ा है लेकिन है एसआईआर की काम में लगातार चार महीने तक जुटे रहे एक सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी ने बताया कि वही नाम कटे हैं जिनके उचित कारण थे।
ना कटने वालों में डबल एड्रेस वालों और मृतकों की संख्या सबसे ज्यादा है। यह सभी नाम 2025 तक की सूची में होने से मतदान का प्रतिशत कम दिखता था। अब जब अंतिम सूची आई है। जो मतदान नहीं कर पाएगा। ऐसे में मतदान का प्रतिशत 10 से 20 प्रतिशत तक बढऩा तय है। डबल एड्रेस वालों की वजह से मतदान का प्रतिशत गिरता था।