
Naxal Surrender: सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान में झारखंड के सारंडा जंगलों में चलाए गए विशेष सर्च ऑपरेशन के दौरान 1.5 करोड़ रुपए के इनामी कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। मिसिर बेसरा नक्सली संगठन की शीर्ष नीति-निर्धारक संस्था 'पोलित ब्यूरो' का सदस्य था और कई राज्यों में नक्सली तंत्र को संचालित कर रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा का छत्तीसगढ़ के बस्तर, अबूझमाड़ और दंडकारण्य क्षेत्र से सीधा कनेक्शन था। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी और पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के बीच तालमेल बिठाने का काम करता था। बस्तर और महाराष्ट्र सीमा से लगे इलाकों में नए कैडरों की ट्रेनिंग, हथियारों की सप्लाई और बड़े हमलों की पटकथा लिखने में उसकी केंद्रीय भूमिका थी। उसकी गिरफ्तारी से नक्सली संगठन के रणनीतिक ढांचे और सप्लाई चेन को बड़ा झटका लगा है। अब देश में नक्सलियों का प्रमुख लीडर एक मात्र गणपति बचा है। जिसकी तलाश में पुलिस और केंद्रीय बल लगातार छापेमारी कर रहा है।
झारखंड के गिरिडीह निवासी मिसिर बेसरा पिछले दो दशकों से संगठन में सक्रिय था। उस पर हत्या, आगजनी और विस्फोट जैसे 100 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। वर्ष 2003-04 में पश्चिम सिंहभूम में हुए एक भीषण ब्लास्ट की साजिश का आरोप भी उसी पर था, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। वर्ष 2009 में बिहार की लखीसराय कोर्ट में हमला कर नक्सली उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा ले गए थे, जिसके बाद से वह लगातार फरार चल रहा था।
एक तरफ जहां शीर्ष नक्सली नेतृत्व पर शिकंजा कसा है, वहीं बीजापुर जिले में 8 सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वालों में 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं। इन सभी पर कुल 49 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस प्रशासन ने सभी का स्वागत करते हुए उन्हें भारत के संविधान की प्रति और प्रोत्साहन राशि सौंपी तथा मुख्यधारा में जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
बीजापुर जिले में नक्सल गतिविधियां भले ही कम हुई हों, लेकिन जंगलों में सालों पहले बिछाए गए प्रेशर आईईडी आज भी बड़ा खतरा बने हुए हैं। बुधवार को उसूर थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग आईईडी धमाकों में दो किशोर गंभीर रूप से घायल हो गए। पहली घटना नीलम सराई जलप्रपात के रास्ते में हुई, जहां सुकमा निवासी 13 वर्षीय सोढ़ी देवा का पैर आईईडी पर पड़ गया।
वहीं दूसरी घटना नम्बी के जंगल में मवेशी चराने गए 15 वर्षीय विनोद कट्टम के साथ हुई। दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है। यह घटनाएं साबित करती हैं कि मानसून के दौरान जलप्रपात घूमने वाले पर्यटकों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए जंगलों में दबे विस्फोटक अभी भी जानलेवा बने हुए हैं।