
डीआरजी के शौर्य से प्रेरित 'बस्तर रेजिमेंट' का प्रस्ताव (photo source- Patrika)
Bastar Regiment: बस्तर के युवाओं की वीरता और सैन्य क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर भारतीय सेना में 'बस्तर रेजिमेंट' गठित करने की आधिकारिक मांग की है।केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए संकेत दिए हैं कि इस दिशा में विचार चल रहा है।
इस आश्वासन के बाद से बस्तर में वर्षों से चली आ रही इस मांग को बड़ी मजबूती मिली है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने अपने पत्र में बस्तर के युवाओं के अदम्य साहस का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय युवा देश के सबसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। जंगल वॉरफेयर और गुरिल्ला युद्ध में उनकी स्वाभाविक दक्षता उन्हें भारतीय सेना की एक विशेष रेजिमेंट के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बनाती है।
प्रस्ताव में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर बटालियन की बड़ी सफलताओं को मुख्य आधार बनाया गया है। स्थानीय युवाओं को जोड़कर बनाई गई इन इकाइयों ने नक्सलियों के खिलाफ कई बड़े और निर्णायक अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। बस्तर का इतिहास हमेशा से संघर्ष और देशप्रेमी वीरता से भरा रहा है। आजादी की लड़ाई के दौरान छत्तीसगढ़ में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े गए 11 प्रमुख संग्रामों में से 7 अकेले बस्तर की धरती पर लड़े गए थे। वर्तमान में भी यहां के युवा अग्निवीर योजना के अलावा राजपूत, गढ़वाल और डोगरा रेजिमेंट जैसी सैन्य इकाइयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
यदि केंद्र सरकार 'बस्तर रेजिमेंट' के गठन को हरी झंडी देती है, तो यह मध्य भारत के किसी आदिवासी बहुल क्षेत्र के नाम पर बनने वाली सेना की पहली विशेष रेजिमेंट होगी। इससे न केवल स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और सम्मान के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि बस्तर की वीर परंपरा को पूरे देश में एक नई पहचान मिलेगी।
Updated on:
29 Jul 2026 07:14 am
Published on:
29 Jul 2026 07:14 am
