Fake High Court e-challan: अब हाईकोर्ट के नाम पर फर्जी ई-चालान और लिंक भेजकर लोगों को डराया जा रहा है और उनसे पैसे वसूलने की कोशिश की जा रही है।
Fake High Court e-challan: साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। अब ठगों ने हाईकोर्ट के नाम पर फर्जी ई-चालान भेजकर लोगों को डराने और उनसे पैसे ऐंठने का नया तरीका अपनाया है। पहले जहां आरटीओ के नाम पर फर्जी ई-चालान भेजे जाते थे, वहीं अब हाईकोर्ट का नाम इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाने की कोशिश की जा रही है।
इस तरह की कुछ मामले बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में भेजे गए जिन्हें देखकर लोग घबरा गए। हालांकि ग्रामीण बहुत ज्यादा ऑनलाइन पेमेंट करने में अभी भी पीछे है इसलिए इस तरह के लिंक मिलने पर जानकार लोगों से पूछने पर फर्जी मैसेज अथवा लिंक होने की पुष्टि हो सकी है।
मैसेज में संदिग्ध या अजीब लिंक दिया होता है।
तुरंत भुगतान करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
मैसेज में गलत भाषा या वर्तनी की गलतियां होती हैं।
लिंक खोलने पर गैर सरकारी वेबसाइट खुलती है।
भुगतान के लिए निजी खाते या अनजान पेमेंट गेटवे का उपयोग कराया जाता है।
वाहन नंबर डालकर सरकारी ई-चालान वेबसाइट पर जांच करें।
केवल आधिकारिक ट्रैफिक या परिवहन पोर्टल से ही भुगतान करें।
किसी भी स्थिति में ओटीपी या बैंक डिटेल साझा न करें।
संदिग्ध मैसेज मिलने पर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
जानकारी के अनुसार लोगों के मोबाइल फोन पर एसएमएस या व्हाट्सएप के माध्यम से ङ्क्षलक भेजा जा रहा है, जिसमें लिखा होता है कि वाहन मालिक ने ट्रैफिक नियम का उल्लंघन किया है और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मैसेज में तुरंत चालान भरने के लिए लिंक दिया जाता है। जैसे ही व्यक्ति इस लिंक पर क्लिक करता है, उसकी निजी जानकारी और बैंकिंग डिटेल साइबर ठगों तक पहुंच सकती है। इसके बाद ठग बैंक खाते से पैसे निकाल सकते हैं। ऐसे में इस तरह की किसी भी मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और ई-चालान की जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर ही जांचें। यदि किसी को इस तरह का मैसेज मिलता है तो पहले उसकी पुष्टि करें और जरूरत पडऩे पर पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें— गीतिका साहू, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व साइबर प्रभारी