जगदलपुर

झीरम घाटी नरसंहार पर बड़ा अपडेट! 11 साल बाद आएगा न्यायिक फैसला, 101 गवाहों के दर्ज हुए बयान

Jhiram Ghati Verdict: झीरम घाटी नरसंहार मामले में 11 साल बाद न्यायिक प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। NIA की विशेष अदालत ने तीन दिन चली मैराथन बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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Jhiram Ghati Naxal Attack
झीरम केस में 31 अगस्त को आएगा फैसला (photo source- Patrika)

Jhiram Ghati Naxal Attack: देश के सबसे बड़े राजनीतिक नरसंहारों में शामिल बहुचर्चित झीरम घाटी कांड में 11 साल बाद न्यायिक प्रक्रिया अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। जगदलपुर स्थित एनआईए के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत में लगातार तीन दिनों तक चली मैराथन बहस के बाद बुधवार दोपहर करीब 2 बजे अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत इस ऐतिहासिक और संवेदनशील मामले में 31 अगस्त को अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। सोमवार से बुधवार तक चली इस अंतिम सुनवाई में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से कुल मिलाकर लगभग 12 घंटे तक जोरदार दलीलें पेश की गईं।

NIA Investigation: 31 अगस्त को फैसला

अंतिम बहस की शुरुआत सोमवार दोपहर 3 बजे अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता दिनेश पाणिग्राही ने की। उन्होंने मंगलवार दोपहर 2 बजे तक मामले से जुड़े मजबूत साक्ष्यों और तथ्यों को अदालत के सामने रखा। इसके बाद बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने लगभग 4 घंटे तक अदालत के समक्ष कानूनी बिंदुओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बचाव पक्ष का मजबूती से पक्ष रखा। बुधवार को दोनों पक्षों की अंतिम प्रत्युत्तर दलीलों को सुनने के बाद एनआईए के विशेष न्यायाधीश ने फैसला 31 अगस्त के लिए सुरक्षित कर लिया।

101 गवाह, 41 आरोपी और 10 पर केस

इस बहुचर्चित प्रकरण की सुनवाई के दौरान कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जांच एजेंसियों ने मामले में कुल 41 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से केवल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी थी। गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में से एक की इलाज/दौरान-ए-ट्रायल मृत्यु हो चुकी है। वर्तमान में 10 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जिनके खिलाफ यह मामला चल रहा है।

क्या था झीरम घाटी नरसंहार?

25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर घात लगाकर भीषण हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार समेत 29 शीर्ष नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों की नृशंस हत्या कर दी गई थी। इसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा और भयावह हमला माना जाता है।

NIA Court Jagdalpur: तारीख घटनाक्रम

25 मई 2013 झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला, 29 की मौत।
27 मई 2013 केंद्र सरकार के निर्देश पर एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली।
28 मई 2013 राज्य सरकार ने विशेष न्यायिक जांच आयोग का गठन किया।
6 जुलाई 2013 न्यायिक आयोग ने अपनी आधिकारिक कार्यवाही शुरू की।
25 सितंबर 2014 एनआईए ने अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की।
28 सितंबर 2015 एनआईए की ओर से सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की गई।
वर्ष 2019 न्यायिक आयोग की कार्यवाही समाप्त होने की प्रक्रिया शुरू।
फरवरी 2020 राज्य सरकार ने मामले में अलग से एसआईटी का गठन किया।
25 मई 2020 दरभा थाने में वृहद साजिश की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज।
6 नवंबर 2021 न्यायिक आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी।
11 नवंबर 2021 राज्य सरकार द्वारा दो सदस्यीय नए जांच आयोग का गठन।
21 नवंबर 2023 सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की एफआईआर की जांच के खिलाफ दायर एनआईए की याचिका खारिज की।
31 अगस्त 2026 एनआईए की विशेष अदालत सुनाएगी बहुप्रतीक्षित फैसला।

Updated on:
13 Aug 2026 07:37 am
Published on:
13 Aug 2026 07:37 am