
Jagdalpur Tourism: मानसून की बारिश के साथ ही बस्तर का प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात अपने पूरे शबाब पर आ गया है। लगातार बारिश के बाद जलप्रपात की जलधाराएं तेज हो गई हैं। चारों ओर फैली घनी हरियाली, पहाड़ियां और चट्टानों के बीच गिरता पानी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में सैलानी तीरथगढ़ पहुंच रहे हैं।
तीरथगढ़ जलप्रपात कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के मुनगाबहार नाले पर स्थित है। जगदलपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर घने जंगल और पहाड़ियों के बीच मौजूद यह जलप्रपात अपनी सीढ़ीनुमा चट्टानी संरचना के लिए प्रसिद्ध है।
जलप्रपात में पानी प्राकृतिक रूप से बनी सीढ़ीनुमा चट्टानों से होकर करीब 300 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। मानसून के दौरान नाले में पानी का बहाव बढ़ने से इसकी धाराएं और भी विशाल और आकर्षक नजर आती हैं। चट्टानों से टकराकर गिरती तेज जलधाराओं की गूंज आसपास के जंगलों में सुनाई देती है। पानी की दूधिया-मटमैली धाराएं और चट्टानों के बीच बनता झरना पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
मानसून के दौरान तीरथगढ़ जलप्रपात के आसपास का पूरा इलाका हरियाली से ढक गया है। घने जंगलों के बीच पहाड़ियों से गिरता पानी यहां आने वाले पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य का अलग अनुभव दे रहा है।
तीरथगढ़ की खूबसूरती सिर्फ जलप्रपात तक सीमित नहीं है। इसके आसपास फैले घने जंगल, ऊंची-नीची पहाड़ियां और चट्टानी संरचनाएं इस पूरे क्षेत्र को बेहद आकर्षक बनाती हैं। बारिश के बाद यहां का प्राकृतिक नजारा और भी मनमोहक हो गया है।
मानसून में जलप्रपात का बदला हुआ स्वरूप देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। पर्यटक तेज बहाव वाली जलधाराओं, हरियाली और पहाड़ियों के खूबसूरत दृश्य का आनंद ले रहे हैं।
तीरथगढ़ जलप्रपात बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। कांगेर घाटी की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच स्थित यह जलप्रपात मानसून में विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है। बारिश के मौसम में यहां गिरती जलधाराएं और आसपास की हरियाली पर्यटकों को खूब लुभा रही हैं।