करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद राजधानी की हवा जहरीली बनी हुई है
जयपुर . करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद राजधानी की हवा जहरीली बनी हुई है। जयपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 200 पार कर गया है। पीएम‑2.5 और पीएम‑10 का स्तर भी खतरनाक सीमा लांघ चुका है। वायु गुणवत्ता बनाए रखने को लेकर धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है। स्वायत्त शासन विभाग (एलएसजी) को 13.50 करोड़ रुपए देने के बाद भी वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पाया है। विभागों के आदेश और पत्र हवा में उड़ गए हैं।
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पिछले दिनों यूडीएच, स्वायत्त शासन, परिवहन विभाग, पीडब्ल्यूडी, रीको और हाउसिंग बोर्ड को पत्र लिखकर वायु गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए थे। इसमें निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों से उठने वाली धूल, सड़कों और खुले क्षेत्रों से फैलने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने को कहा था। इसके साथ ही वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं की व्यवस्था और जनरेटर के संचालन पर निगरानी रखने की बात की गई थी। पार्किंग सुविधाओं की कमी और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती से कार्रवाई करने की जरूरत पर जोर दिया गया था, लेकिन संबंधित विभागों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
वर्तमान में शहर का एक्यूआइ 200 से भी पार जा रहा है। सोमवार को मानसरोवर क्षेत्र सबसे अधिक प्रदूषित रहा, जहां का एक्यूआइ 224 तक पहुंच गया। जबकि आदर्श नगर, राजा पार्क, शास्त्री नगर, विद्याधर नगर और सीतापुरा जैसे क्षेत्रों में भी एक्यूआइ 175 से अधिक रहा।
हवा में पीएम-2.5 और पीएम-10 के कणों का स्तर भी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। मानसरोवर और सीतापुरा क्षेत्र में पीएम-2.5 का स्तर 300 से अधिक रहा, जबकि पीएम-10 का स्तर 400 को पार कर गया। मानसरोवर में पीएम-2.5 का स्तर 378 व पीएम-10 का स्तर 424 तक पहुंच गया, जबकि सीतापुरा में पीएम-2.5 का स्तर 332 व पीएम-10 का स्तर 402 रहा। इस उच्च स्तर के प्रदूषण के कारण हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।