Rajasthan Bureaucracy News Latest : राजस्थान की नौकरशाही में एक बड़ा और दिलचस्प फेरबदल देखने को मिला है। जिन अधिकारियों ने अभी 1 अप्रैल को ही नई नियुक्तियों के तहत कार्यभार संभाला था, उन्हें ज्वॉइनिंग के तुरंत बाद 'चुनावी समर' में भेज दिया गया है।
राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। राज्य सरकार ने अभी 1 अप्रैल को ही कई जिलों में नए कलेक्टर और संभागीय आयुक्तों की तैनाती की थी, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद इनमें से 5 IAS अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए अन्य राज्यों में भेज दिया गया है। कार्मिक विभाग ने शनिवार को आदेश जारी कर इन रिक्त हुए पदों की जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों को सौंपी है।
हैरानी की बात यह है कि इनमें से 4 कलेक्टर और 1 संभागीय आयुक्त ऐसे हैं, जिन्हें हाल ही में 1 अप्रैल की तबादला सूची में नई जिम्मेदारियां दी गई थीं। इन अधिकारियों ने अभी मुश्किल से अपनी कुर्सी संभाली ही थी कि उन्हें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी जैसे चुनावी राज्यों में ऑब्जर्वर बनाकर भेज दिया गया।
कार्मिक विभाग ने शासन की निरंतरता बनाए रखने के लिए तुरंत प्रभाव से अतिरिक्त प्रभार के आदेश जारी किए हैं:
दो जिलों में जिला कलेक्टर की गैर-मौजूदगी में अनुभवी RAS अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है:
इन अधिकारियों की ड्यूटी दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों और कुछ उपचुनावों में लगाई गई है। निर्वाचन आयोग ने इन अधिकारियों की प्रशासनिक दक्षता और अनुभव को देखते हुए इन्हें ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया है। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी जब तक ये अधिकारी अपनी चुनावी जिम्मेदारियां पूरी कर राजस्थान वापस नहीं लौट जाते।
ज्वॉइनिंग के तुरंत बाद कलेक्टरों के चुनाव ड्यूटी पर जाने से जिलों के विकास कार्यों और नियमित जनसुनवाई पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने से फाइलों का निस्तारण तो होगा, लेकिन 'फुल-टाइम' कलेक्टर न होने से नए प्रोजेक्ट्स की गति धीमी होने की संभावना है।