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Rajasthan News : अब ‘आपदा’ से पहले ही मिल जाएगी ‘चेतावनी’, जानें कैसे काम करेगा सरकार का ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’?

अब राजस्थान में केवल आपदा आने के बाद राहत ही नहीं दी जाएगी, बल्कि 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' (Early Warning System) के जरिए आपदा आने से पहले ही लोगों को सुरक्षित किया जाएगा।

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राजस्थान को प्राकृतिक आपदाओं और शहरी बाढ़ जैसी समस्याओं से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार ने अपनी रणनीति बदल दी है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को सचिवालय में राज्य कार्यकारी समिति (SEC) की महत्वपूर्ण बैठक ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय रहते चेतावनी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही जन-धन की हानि को कम किया जा सकता है। बैठक में जयपुर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों के ड्रेनेज सिस्टम और किसानों के लिए जल संरक्षण को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए।

अर्ली वार्निंग सिस्टम: खतरे से पहले बजेगा अलार्म

मुख्य सचिव ने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिए कि प्रदेश के बाढ़ संभावित और संवेदनशील जिलों में 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' को जल्द से जल्द स्थापित किया जाए।

  • क्या होगा फायदा: इस तकनीक के माध्यम से भारी बारिश या बाढ़ आने से पहले ही स्थानीय नागरिकों को मोबाइल और अन्य माध्यमों से अलर्ट भेजा जाएगा, ताकि वे सुरक्षित स्थानों पर जा सकें।

'शहरी बाढ़' का स्थायी समाधान

राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे शहरों में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव को लेकर मुख्य सचिव ने चिंता जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि:

  • ड्रेनेज सिस्टम और प्रोटेक्शन वॉल के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।
  • शहरी जलभराव की समस्या का दीर्घकालिक (Long-term) समाधान निकाला जाए, ताकि हर साल होने वाली परेशानी खत्म हो।
  • DMIS 2.0 जैसी आधुनिक तकनीक को लागू कर आपदा प्रबंधन को डिजिटल बनाया जाए।

अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य

हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए मुख्य सचिव ने राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश दिए। अब प्रदेश के सभी प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा और सुरक्षा के तमाम इंतजाम पुख्ता किए जाएंगे।

किसानों के लिए 'जल कवच' और मंडी सुरक्षा

किसानों और कृषि क्षेत्र को आपदाओं से बचाने के लिए मुख्य सचिव ने दोहरे निर्देश जारी किए:

  • जल संरक्षण: कृषि विभाग को फार्म पॉण्ड, ड्रिप सिंचाई, मिनी स्प्रिंकलर और वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को बढ़ावा देने को कहा गया है ताकि प्रतिकूल मौसम में भी किसानों के पास पानी का विकल्प रहे।
  • मंडी शेड: राज्य कृषि विपणन बोर्ड को निर्देश दिए गए कि मंडियों में खुले में पड़े अनाज को भीगने से बचाने के लिए शेड निर्माण का कार्य तुरंत पूरा किया जाए।

SDRF राहत राशि में अब नहीं होगी देरी

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आपदा प्रभावित नागरिकों और किसानों को एसडीआरएफ (SDRF) के अंतर्गत मिलने वाली राहत राशि का भुगतान समयबद्ध तरीके से किया जाए। उन्होंने पारदर्शिता और गुणवत्ता पर जोर देते हुए जिला कलेक्टरों को नियमित मॉनिटरिंग के आदेश दिए।