
Rajasthan Monsoon 2026: थार मरुस्थल लगातार बरसात वाला हिस्सा बनते जा रहा है। वर्ष 2025 में रिकॉर्ड बारिश के बाद 2026 में भी मानसून से पहले ही राजस्थान में जून के पहले पखवाड़े में सामान्य से 65 प्रतिशत अधिक बरसात हो चुकी है। पूर्वी राजस्थान में 100 प्रतिशत और पश्चिमी राजस्थान में 27 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। हर महीने चार से पांच पश्चिमी विक्षोभ आने और उसको अरब सागर की नमी मिलने से बादल बरस रहे हैं। मानसून अभी महाराष्ट्र में अटका हुआ है। उसके मुम्बई पहुंचने की सामान्य तारीख 10 जून है लेकिन 15 जून तक नहीं पहुंच पाया। ऐसे में राजस्थान में इसी महीने के अंतिम सप्ताह में मानसून पहुंचने की संभावना है। प्रदेश में मानसून के प्रवेश करने के साथ ही झमाझम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा।
प्रदेश में बरसात का पैटर्न बदल रहा है। एक जून से लेकर 15 जून तक राजस्थान में सामान्य बारिश 15 मिलीमीटर है लेकिन प्रदेश में अब तक 24.8 मिमी बरसात हो चुकी है। भरतपुर, धौलपुर, बूंदी जैसे हिस्सों में 200 से 400 प्रतिशत अधिक बरसात हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस साल ऑवर ऑल मानसून भले ही कमजोर रहे लेकिन राजस्थान में अच्छी खासी बारिश प्राप्त हो जाएगी।
वर्ष 2010 और 2020 के दशक में केवल 2014 और 2018 ऐसे वर्ष रहे, जब वर्षा सामान्य या सामान्य से कम रही। अधिकांश वर्षों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। 2011 और 2019 में वर्षा सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक रही थी।
वर्ष 2001 से 2020 के बीच उपग्रह आंकड़ों के अनुसार भूमि सतह में हो रहे बदलाव पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन को सबसे अधिक प्रभावित कर रहे हैं। इसमें भारत-पाकिस्तान का थार मरुस्थल प्रमुख ‘हॉटस्पॉट’ के रूप में उभरा। थार में वनस्पति की हरियाली (एनडीवीआई) और घनत्व (एलएआई) में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही मिट्टी की नमी और कृषि विस्तार ने भूमि की चमक कम कर दी, जिससे अधिक सूर्य ऊर्जा अवशोषित होने लगी। भूमि की परावर्तन क्षमता (एल्बिडो) कम होने से गर्मी बढ् रही है।
पिछले कुछ समय से मानसून की ट्रफ लाइन उत्तर से सामान्य थोड़ा नीचे सरक गई है जिससे कारण पश्चिमी राजस्थान में बारिश का स्तर बढ़ा है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ अब अरब सागर से भी नमी मिल रही है। दोनों सागरों की नमी से भी बारिश की तीव्रता में इजाफा हुआ है।
पूरे देश में 2026 के मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की आशंकाओं के बावजूद राजस्थान में बारिश का यह असामान्य उछाल उल्लेखनीय है। अत्यधिक बारिश के वर्ष लगातार बढ़ रहे हैं यानी मानसून पहले की तुलना में अधिक अनियमित और चरम होता जा रहा है।