22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अवैध निर्माण मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जयपुर डेवलपमेंट अपीलेट ट्रिब्यूनल को दो हफ्ते में सभी केस निपटाने के निर्देश

अवैध निर्माण और भूमि उपयोग के उल्लंघन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जयपुर डेवलपमेंट अपीलेट ट्रिब्यूनल को दो सप्ताह के भीतर अपने पास लंबित सभी मामलों का निस्तारण करने का निर्देश दिया है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Manish Chaturvedi

•

Updated: 6 Aug 2026, 10:18 PM IST

mini sood submitted an application at the indore collectorate

mini sood submitted an application at the indore collectorate (Photo Source - Patrika)

जयपुर। अवैध निर्माण और भूमि उपयोग के उल्लंघन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जयपुर डेवलपमेंट अपीलेट ट्रिब्यूनल को दो सप्ताह के भीतर अपने पास लंबित सभी मामलों का निस्तारण करने का निर्देश दिया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि आदेश की अवहेलना हुई तो इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी ट्रिब्यूनल के प्रिसाइडिंग ऑफिसर की होगी।

जेडीए ने रखी कार्रवाई रुकने की दलील

सुनवाई के दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से अदालत को बताया गया कि शहर में कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ शुरू की गई सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ट्रिब्यूनल से मिले अंतरिम स्थगन आदेशों के कारण लंबे समय से रुकी हुई है। जेडीए का कहना था कि इन स्टे ऑर्डर्स की वजह से अवैध निर्माणों पर प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई संभव नहीं हो पा रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश दिया।

कृषि भूमि पर व्यावसायिक निर्माण का आरोप

सुनवाई में अदालत को बताया गया कि धारा 90-बी के तहत आवासीय कॉलोनियों की मंजूरी के दौरान जेडीए को हस्तांतरित कृषि भूमि और खुली जमीन पर कथित रूप से अतिक्रमण कर लिया गया। आरोप है कि जेडीए के कब्जे वाली भूमि पर बिना वैधानिक स्वीकृति के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, रिजॉर्ट और अन्य व्यावसायिक निर्माण खड़े कर दिए गए। इन निर्माणों के खिलाफ जेडीए ने कार्रवाई शुरू की, लेकिन संबंधित पक्ष ट्रिब्यूनल पहुंच गए और अंतरिम राहत मिलने से कार्रवाई रुक गई।

30 जुलाई के अंतरिम आदेश पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान 30 जुलाई को ट्रिब्यूनल के प्रिसाइडिंग ऑफिसर महावीर प्रसाद गुप्ता द्वारा पारित अंतरिम आदेश का भी उल्लेख किया गया। इस आदेश में जेडीए को अंतिम निर्णय तक किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश की प्रति प्रवर्तन अधिकारियों को मिलने के बाद सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इस पहलू पर भी सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से विचार किया।

कोर्ट बोला- आरोप सही हैं तो मामला बेहद गंभीर

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अदालत के समक्ष रखे गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह स्थिति केवल चौंकाने वाली नहीं बल्कि अत्यंत गंभीर है। कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन नोटिस जारी होने के बावजूद अंतरिम आदेशों की आड़ में कथित अवैध निर्माण जारी रहना कानून के शासन पर सवाल खड़े करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी निर्माण के लिए स्वीकृत भवन योजना या वैधानिक अनुमति नहीं है तो केवल अंतरिम आदेश के आधार पर उसे वैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का दो सप्ताह के भीतर गुण-दोष के आधार पर निस्तारण किया जाए, ताकि अवैध निर्माणों से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।