जयपुर

Rajasthan: घोटाला करके फरार हुए पति-पत्नी 8 साल बाद गिरफ्तार, 2018 में फर्जी पट्टों पर लिया था करोड़ों रुपए का बैंक लोन

Husband-Wife Arrested In Loan Embezzled: जयपुर के चर्चित दी राजलक्ष्मी महिला अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लोन घोटाले में पुलिस ने 2018 से फरार चल रहे आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। दोनों पर फर्जी पट्टों और दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपए का बैंक लोन स्वीकृत करवाकर गबन करने का आरोप है।
2 min read
Aug 03, 2026
Criminal Couple
गिरफ्तार पति-पत्नी की फोटो: पत्रिका

Rajlaxmi Mahila Urban Co-operative Bank loan scam: जयपुर के बहुचर्चित दी राजलक्ष्मी महिला अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लोन घोटाले में माणकचौक थाना पुलिस ने साल 2018 से फरार चल रहे 10-10 हजार रुपए के इनामी आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंक से करोड़ों रुपए का लोन स्वीकृत करवाकर गबन करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रह रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे लगातार ठिकाने बदल रहे थे, लेकिन तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस उनकी लोकेशन तक पहुंचने में सफल रही।

डीसीपी (नॉर्थ) करण शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी प्रमोद शर्मा (65) और उनकी पत्नी सिंधु शर्मा (50) हैं। दोनों जयपुर के झोटवाड़ा की स्वर्ण कॉलोनी के निवासी हैं तथा मूलतः फुलेरा के रहने वाले हैं। दोनों पर पहले से ही न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके थे। लगातार फरार रहने के कारण पुलिस ने दोनों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। गिरफ्तारी के बाद दोनों से घोटाले में उनकी भूमिका और अन्य आरोपियों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

फर्जी सोसायटियों के पट्टों पर मंजूर कराए 13 लोन खाते

पुलिस के अनुसार 28 सितंबर 2018 को बैंक के ऋण प्रभारी सादत अली ने मामला दर्ज कराया था। जांच में सामने आया कि बैंक की तत्कालीन अध्यक्षा डॉ. फिरोजा बानो, बैंक अधिकारियों, ऋणियों, गारंटरों व अधिवक्ताओं सहित कुल 59 आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचा। इन्होंने फर्जी हाउसिंग सोसायटियों के पट्टे और विवादित संपत्तियों के दस्तावेज गिरवी रखकर नियमों के खिलाफ 13 ऋण खाते स्वीकृत कराए और करोड़ों रुपए हड़प लिए। जांच में यह भी सामने आया कि लोन स्वीकृति के दौरान बैंक के निर्धारित नियमों और दस्तावेजों के सत्यापन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसी का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़ी राशि के ऋण स्वीकृत कराए गए। पुलिस का कहना है कि मामले में पहले भी कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और शेष फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।

Updated on:
03 Aug 2026 07:27 am
Published on:
03 Aug 2026 07:25 am