
जयपुर. नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पानी के मामले में राजस्थान को रेड जोन में रखा है। इसमें भी जयपुर की स्थिति खासी खराब है। राजधानी में रोजाना लाखों लोग पानी के लिए परेशान होते हैं लेकिन जिम्मेदार बेफिक्र हैं। उन्हें न अंधाधुंध दोहन की चिन्ता है, न बेखौफ होते पानी माफिया पर लगाम कसने की परवाह। ऐसे में परेशानी बढऩे के साथ प्रकृति का तंत्र भी गड़बड़ा रहा है। राजस्थान पत्रिका ने शनिवार को पड़ताल की तो यही गम्भीर स्थिति सामने आई है। आमजन तो दूर, वीवीआइपी इलाकों में भी आसानी से पानी उपलब्ध नहीं मिल रहा है। हालात बिगडऩे के बावजूद जलदाय विभाग के पास न इच्छाशक्ति दिखाई दे रही है न ठोस योजना।
पांव पसार रहा पानी माफिया
शहर की 40 लाख आबादी में से 5 लाख से अधिक लोगों को रोजाना पानी के लिए तरसना पड़ता है। जलदाय विभाग इन इलाकों में पानी पहुंचाने में नाकाम है। इसी का फायदा उठाकर पानी माफिया पांव पसार रहा है। बेखौफ पानी माफिया ने घरों में बोरिंग कर हजारों लीटर की टंकियां बनवा ली हैं। इन टंकियों को भरकर टैंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा है।
यहां बुरा हाल
राजधानी में सबसे बुरा हाल प्रतापनगर, सांगानेर, मालवीयनगर, जयसिंहपुरा खोर और आगरा रोड का है। इन इलाकों में ३ हजार से अधिक कॉलोनियों में पानी माफिया का दबदबा है। विभाग की मिलीभगत कहें या लापरवाही, ये लोग बेखौफ होकर दिनभर टैंकरों से जलापूर्ति करते नजर आते हैं। घर-घर में लगे ट्यूबवैल और बाहर बनी पानी की बड़ी टंकी से टैंकरों में सप्लाई के दृश्य आम होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। टोंक रोड इलाका भी इससे अछूता नहीं है।
किसी का डर नहीं
पड़ताल में सांगानेर इलाके की सैकड़ों कॉलोनियों में पानी की खासी किल्लत नजर आई। कुछ कॉलोनियों में तो पानी के लिए लोग निजी टैंकरों के ही भरोसे हैं। शिक्षा सागर कॉलोनी में 5 हजार लोगों की आबादी पानी की बूंद-बूंद को तरस रही है। इस इलाके में टैंकर चालक बेखौफ होकर हल्दीघाटी मार्ग पर सडक़ किनारे ही टैंकर भरते देखे। ऐसा ही हाल शताब्दीनगर में नजर आया। वहां घर के एक कोने में पानी की बड़ी टंकी में लगा बड़ा नॉजल टैंकर भरने की गवाही दे रहा था।