मध्य—पूर्व में युद्ध का असर अब जयपुर की सड़कों पर भी दिखने लगा है। बुकिंग के सात दिन बाद डामर मिल रहा है। कीमतों में 10 हजार रुपए तक का उछाल आने से ठेकेदारों ने काम बंद कर दिए हैं।
जयपुर। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध का असर अब जयपुर की सड़कों तक पहुंच गया है। कच्चे तेल के बाजार में उठापटक के कारण डामर (बिटुमेन) महंगा होने के साथ उसकी सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि पहले बुकिंग के दिन ही मिलने वाला डामर अब सात दिन की देरी से पहुंच रहा है। इसका सीधा असर शहर में चल रहे सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों पर पड़ने लगा है, जिसके चलते ज्यादातर ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है।
जयपुर में डामर की आपूर्ति मुख्य रूप से मथुरा और पानीपत रिफाइनरी से होती है, लेकिन हाल के दिनों में सप्लाई चेन सुस्त पड़ गई है। अभियंताओं के मुताबिक, सामग्री के अभाव में मशीनें और मजदूर खाली बैठने को मजबूर हैं।
जेडीए, नगर निगम, रीको, सार्वजनिक निर्माण विभाग और आवासन मंडल के ठेकेदारों के पास स्टॉक खत्म हो गया है। कई जगह खुदी हुई सड़कें अब तक बनना शुरू नहीं हो पाई हैं। जेडीए ने कार्यादेश तो दे दिए, लेकिन डामर की कमी से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। मालवीय नगर पुलिया की मिलिंग और बाहरी वार्डों में सड़कों का काम भी सुस्त पड़ गया है।
कच्चे तेल की आवक प्रभावित होने से रिफाइनरियों ने डामर पर दी जाने वाली करीब 5000 रुपए प्रति टन की छूट बंद कर दी है। इसके साथ ही डामर के उपयोग में आने वाले लाइट डीजल ऑयल (एलडीओ) की कीमत भी 41 रुपए से बढ़कर 57 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं।
- जयपुर में 200 करोड़ रुपए से अधिक के काम जारी हैं।
- प्रदेश भर में 4000 करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट प्रभावित।
- जयपुर और आसपास के क्षेत्र में 15 बिटुमेन मिक्स प्लांट संचालित।
16 फरवरी: 46,402
1 मार्च: 46,532
5 मार्च: 48,532
16 मार्च: 51,092
नोट: 16 मार्च से पांच हजार रुपए की अतिरिक्त छूट भी खत्म कर दी गई है।