अमृत महोत्सव विजन 2030 के तहत जयपुर को ऐसा हेल्थ हब बनाने का लक्ष्य है, जहां जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो। उद्देश्य यह है कि मरीजों को रिफरल के लिए भटकना न पड़े और जयपुर ‘रिफरल सिटी’ नहीं, बल्कि ‘रिजॉल्यूशन सिटी’ के रूप में विकसित हो।
जयपुर: जब घर का कोई सदस्य बीमार होता है तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है, क्या इलाज समय पर मिल पाएगा? क्या डॉक्टर उपलब्ध होंगे? क्या जांच और सर्जरी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ेगा? क्या बड़े शहरों का रुख करना पड़ेगा?
साल 2030 का जयपुर ऐसा हो, जहां इलाज के लिए लंबी कतारें नहीं, बल्कि सुलभ और आधुनिक सुविधाएं हों। राजधानी का स्वास्थ्य ढांचा केवल इमारतों का नहीं, बल्कि भरोसे का विस्तार हो। सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से लेकर टेलीमेडिसिन और आपातकालीन रिस्पांस तक…यह विजन हर नागरिक की सुरक्षा से जुड़ा है।
राजस्थान के कोने-कोने से गंभीर मरीज जयपुर का रुख करते हैं। ऐसे में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर केवल किसी एक शहर का विषय नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जीवन रेखा है। अमृत महोत्सव के इस अवसर पर सवाल है, क्या 2030 तक जयपुर इलाज के लिए 'रिफरल सिटी' नहीं, बल्कि 'रिजॉल्यूशन सिटी' बन पाएगा?
जयपुर लंबे समय से राजस्थान की चिकित्सा राजधानी भी रहा है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध अस्पतालों पर प्रदेशभर के मरीजों का भरोसा टिका है। यहां प्रतिदिन औसतन 8-10 हजार (ओपीडी) मरीज आते हैं और सालाना हजारों जटिल सर्जरी होती हैं।
आज भी कई मरीजों को हार्ट, न्यूरो या कैंसर के जटिल मामलों में राज्य से बाहर जाना पड़ता है। विजन 2030 का लक्ष्य स्पष्ट है जटिल से जटिल बीमारी का इलाज जयपुर में ही उपलब्ध हो।
पहले बाहर रेफर, अब जयपुर में इलाज
एसएमएस अस्पताल में बन रहे आईपीडी टावर में विश्व स्तरीय अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। यहां ओपीडी की सुविधा भी रहेगी। मरीजों के लिए इमरजेंसी बेड भी उपलब्ध रहेंगे। इससे इमरजेंसी हालत में उन्हें तुरंत उपचार मिल सकेगा।
यहां सीटी एमआरआई, कार्डियक डायग्नोसिस, हिमेटोलोजी इत्यादि जांचों की सुविधा भी मिलेगी। ओपीडी में दिखाने के बाद जांचों के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और एक ही छत के नीचे तमान सुविधाएं मिल सकेंगी।
जयपुर की 45 वर्षीय सुनीता (बदला नाम) को ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। समय पर स्क्रीनिंग-उपचार से वह स्वस्थ हैं। वह कहती हैं…जांच में देर से शायद जिंदा नहीं होती।