
Ashok Gehlot : कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने आज जयपुर के एसएमएस अस्पताल पहुंचकर जोधपुर अग्निकांड में आग बुझाते समय घायल एवं यहां उपचाररत अग्निशमन दल के कार्मिकों के उपचार और स्वास्थ्य की स्थिति के संबंध में चिकित्सकों से जानकारी ली। साथ ही जोधपुर के चीफ फायर ऑफिसर से हादसे के संबंध में भी जानकारी ली। इन कार्मिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए, अपनी जान की परवाह किए बिना एक दर्जन से अधिक लोगों की जान बचाई, परन्तु केमिकल कंटेनरों में अचानक हुए विस्फोट से ये घायल हो गए। ईश्वर से इन सभी निर्भीक अग्निशमन कार्मिकों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उपचाररत अग्निशमन दल के कार्मिकों के इलाज के बारे में जानकारी लेने के पश्चात मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने कहा कि बर्न केस होने के कारण मरीजों से सीधे मिलना संक्रमण के लिहाज से उचित नहीं था। इसलिए मैंने अस्पताल के प्रिंसिपल, इलाज कर रहे डॉक्टर्स और हमारे साथ आए जोधपुर के चीफ फायर ऑफिसर के साथ बैठकर मीटिंग की। मरीजों का इलाज सही तरीके से चल रहा है और किसी ने कोई शिकायत नहीं की है।
चीफ फायर ऑफिसर जलज घसिया ने बताया कि वे खुद मौके पर मौजूद थे। आग बुझाने के दौरान अंत में जब एक बड़ा विस्फोट हुआ, तो छत गिर गई और केमिकल की टंकी टूट गई। उस भयानक ब्लास्ट में ये सभी लोग घायल हो गए। कुल 15 घायलों में से 2 को तो प्राथमिक उपचार के बाद वहीं छुट्टी दे दी गई थी। वर्तमान में 7 लोग जोधपुर के अस्पताल में भर्ती हैं और 6 लोगों का यहाँ एसएमएस में इलाज चल रहा है।
यहां भर्ती 6 दमकलकर्मियों में से एक मरीज 20 फीसदी बर्न है, जबकि बाकी 50 फीसदी से ज्यादा बर्न हैं। आप जानते हैं कि 50 फीसदी से अधिक जलने पर स्थिति गंभीर (क्रिटिकल) हो जाती है और उनका विशेष ध्यान रखना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन उनका पूरा ध्यान रख रहा है और व्यवस्था में कोई कमी नहीं है।
अशोक गहलोत ने कहा कि मैं फायर ऑफिसर्स और फायर फाइटिंग की पूरी टीम को धन्यवाद देना चाहता हूं। उन्होंने अपनी जान पर खेलकर लोगों को बचाया, वरना जनहानि (कैज़ुअल्टी) और भी ज्यादा हो सकती थी। आग बुझाने के दौरान फायर ब्रिगेड के जिन कर्मचारियों को चोटें आई हैं, उसका हम सभी को बेहद दुख है। डॉक्टर्स ने आश्वस्त किया है कि इलाज में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।
अशोक गहलोत ने कहा कि ठेका प्रथा पर काम करने वाले लोग भारी तकलीफ में हैं। हमारी सरकार के समय अस्पतालों और अन्य जगहों पर काम करने वाले करीब 1 लाख संविदा कर्मी थे, जिन्हें हमने स्थायी करने का फैसला किया था। लेकिन सरकार बदलते ही वह काम रोक दिया गया। आज वे लोग रो रहे हैं, गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
अशोक गहलोत ने कहा कि 20-25 साल काम करने के बावजूद उन्हें मुश्किल से 7-8 हज़ार रुपए मिलते हैं। उनके जीवन स्तर को सुधारने और बेहतर मानदेय दिलाने के लिए, हमने पूर्व सैनिकों की तर्ज़ पर एक संस्था (एजेंसी) बनाई थी, जिसके माध्यम से उन्हें काम मिलना था। लेकिन सरकार बदलते ही वह योजना भी बंद कर दी गई।
अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल से आग्रह करते हुए कहा कि जनहित के कुछ काम ऐसे होते हैं, जिनमें यह नहीं देखा जाना चाहिए कि फैसले पिछली सरकार के हैं। नई सरकार को यह देखना चाहिए कि उन फैसलों को कैसे लागू किया जाए, जिससे गरीबों, कर्मचारियों और समाज के हर वर्ग को उसका सीधा लाभ मिले।
संविदा कर्मियों को नियमित कैसे किया जाए, उन्हें पक्का कैसे किया जाए इन तमाम मुद्दों पर सरकार को आगे आकर अपना विजन स्पष्ट करना चाहिए और जनता को विश्वास में लेना चाहिए।