
Rajasthan Draught : राजस्थान में इस बार मानसून में कम बारिश की वजह से खेती और पशुपालन दोनों के समक्ष संकट खड़ा हो गया है। सरकार व प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी और राहत की व्यवस्था में जुटा है। इधर कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया X पर चिंता जताते हुए लिखा कि बहुत चुनौतीपूर्ण समय हमारे सामने आ रहा है, सरकार को तुरंत हरकत में आकर प्रदेशभर के लिए एक व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना बनाकर स्वीकृतियां जारी करनी होंगी।
अशोक गहलोत ने लिखा कि राजस्थान में बीते 10 साल का सबसे बड़ा अकाल सामने है। जोधपुर जिले में तकरीबन 2000 गांवों में सूखे जैसे हालात हैं, बाड़मेर के 2460, बालोतरा के 1216 और जैसलमेर के 961 गांव सूखे की चपेट में हैं। पशुओं के चारे का संकट बढ़ता जा रहा है। कमोबेश यही स्थिति पूरे मारवाड़ सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों की भी है। जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा में चारे की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, बताया जा रहा है कि चारा 1200 रुपए प्रति मन है और पशुपालकों के लिए इसे लेना उनके बूते से बाहर है, जिससे पशुओं के लिए संकट बढ़ रहा है।
अशोक गहलोत ने आगे लिखा कि अकाल और सूखे की सबसे अधिक मार मूक पशुओं पर पड़ती है। जब चारे की कीमतें बढ़ती जाती हैं तो पशुपालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और कई बार वे पशुओं को खुले में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे हालातों में प्यास और भूख से तड़पते पशुओं की कई बार जान तक चली जाती है। इसलिए सरकार को तत्काल प्रभाव से चारे की बढ़ती कीमतों पर रोक लगानी चाहिए और प्रदेशभर में चारे व पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए मजदूरी और रोजगार की तैयारी भी अभी से शुरू की जानी चाहिए, ताकि सूखे से प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके।
अशोक गहलोत ने लिखा कि बाड़मेर में अभी दो दिन पहले मुख्यमंत्री ने जो घोषणाएं की थीं, बताया जा रहा है कि 48 घंटे बाद भी प्रशासन को सरकार से लिखित स्वीकृति का इंतजार है। ऐसी ढिलाई से काम नहीं चलेगा, यह बहुत चुनौतीपूर्ण समय हमारे सामने आ रहा है, सरकार को तुरंत हरकत में आकर प्रदेशभर के लिए एक व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना बनाकर स्वीकृतियां जारी करनी होंगी।